मेरे राम का मुकुट भीग रहा है-निबंध | Mere Ram Ka Mukut Bheeg Raha Hai - Nibandha

By: विद्यानिवास मिश्र - Vidya Niwas Mishra
मेरे राम का मुकुट भीग रहा है-निबंध | Mere Ram Ka Mukut Bheeg Raha Hai  - Nibandha by


दो शब्द :

इस निबंध का शीर्षक "मेरे राम का मुकुट" है, जिसे विद्यानिवास मिश्र ने लिखा है। लेखक अपने प्रवास के अनुभवों और विन्ध्य प्रदेश से अपने संबंधों को साझा करते हैं। वे बताते हैं कि वे पिछले बीस वर्षों से विन्ध्य के अंचल में रह रहे हैं और इस दौरान उन्होंने प्रकृति, संस्कृति और स्थानीय जीवन की गहराई से समझ विकसित की है। लेखक की यादों में हिमालय की छवि, तराई की मिट्टी, और वहाँ की नदियों का वर्णन है, जो उनकी आत्मीयता का प्रतीक हैं। वे अपने बचपन की यादों को ताजगी के साथ जीवित करते हैं और बताते हैं कि कैसे इस प्रदेश की धरती ने उन्हें अपने अतीत से जोड़ा है। लेखक ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए यह भी कहा है कि वे अपने लेखन के माध्यम से इस भूमि की एकता और विविधता को दर्शाना चाहते हैं। वे यह महसूस करते हैं कि भारत की सांस्कृतिक विविधता में एकता है और इसे समझने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण की आवश्यकता है। उनकी लेखनी में गहन विचार हैं कि कैसे एक व्यक्ति अपनी मातृभूमि से जुड़ा रहता है और उसकी पहचान उसके परिवेश से कैसे बनती है। वे यह भी बताते हैं कि भारतीय संस्कृति में प्रेम और ममता का महत्व है, और यह कि हमें अपनी मातृभूमि के प्रति समर्पित रहना चाहिए। इस निबंध में विद्यानिवास मिश्र ने न केवल अपने अनुभवों को साझा किया है, बल्कि भारतीय संस्कृति की गहराई और उसके प्रति अपनी निष्ठा को भी व्यक्त किया है। उनका लेखन भावनाओं और विचारों का एक संवेदनशील मिश्रण है, जो पाठकों को एक गहरी सोच में डाल देता है।


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