विश्व भूगोल | Vishwa Bhugol

- श्रेणी: इतिहास / History भूगोल / Geography
- लेखक: अज्ञात - Unknown
- पृष्ठ : 543
- साइज: 11 MB
- वर्ष: 1947
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दो शब्द :
इस पाठ में सौर मंडल और आकाश में उपस्थित विभिन्न खगोलीय पिंडों के बारे में जानकारी दी गई है। इसमें सूर्य, तारे, नक्षत्र, ग्रह, उपग्रह और पुच्छल तारे (कमीट) का वर्णन किया गया है। सूर्य को सौर मंडल का केंद्र माना गया है, जो अन्य ग्रहों और उपग्रहों के साथ आकाश में एक निश्चित स्थान पर स्थित है। पाठ में यह भी बताया गया है कि आकाश में लाखों तारे हैं, लेकिन हमें केवल कुछ ही दिखाई देते हैं। नक्षत्रों का समूह भी वर्णित किया गया है, जिसमें विभिन्न तारों के समूह जैसे दूध का रास्ता और अन्य नक्षत्रों का जिक्र है। पुच्छल तारों के बारे में बताया गया है कि ये सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करते हैं और उनकी आकृति में भिन्नता होती है। इनकी उत्पत्ति के पीछे विभिन्न वैज्ञानिक धारणाएं भी प्रस्तुत की गई हैं। इसके अलावा, पाठ में उल्काओं और उनके टूटने की चर्चा की गई है, जिसमें बताया गया है कि ये वास्तव में तारे नहीं होते, बल्कि छोटे पिंड होते हैं जो पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं। सूर्य के आकार, द्रव्यमान और तापमान के बारे में भी जानकारी दी गई है। यह बताया गया है कि सूर्य पृथ्वी के मुकाबले बहुत बड़ा है और उसका द्रव्यमान पृथ्वी से लाखों गुना अधिक है। सूर्य पर तापमान बहुत अधिक होता है और यह एक गैसीय पिंड है। आखिर में, पाठ में सूर्य की प्रकाश और गर्मी के प्रभावों का भी उल्लेख किया गया है, जैसे कि यदि सूर्य की गर्मी को रोक दिया जाए, तो पृथ्वी पर क्या प्रभाव पड़ेगा। इस प्रकार, पाठ में खगोल विज्ञान के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई है, जो हमें आकाश की विशालता और उसमें उपस्थित पिंडों की विशेषताओं को समझने में मदद करती है।
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