आयुर्वेद चिकित्सा सार | Ayurved Chikitsa Sar

- श्रेणी: Aushadhi | औषधि Ayurveda | आयुर्वेद Homoeopathic and Medical Sciences | होमियोपैथिक और चिकित्सा
- लेखक: अज्ञात - Unknown
- पृष्ठ : 101
- साइज: 3 MB
- वर्ष: 1931
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दो शब्द :
इस पाठ में औषधियों के गुण और उनकी शुद्धि तथा भस्म प्रक्रिया पर चर्चा की गई है। लेखक ने इस विषय पर विस्तृत जानकारी देने का प्रयास किया है। आरंभ में, लेखक ने यह बताया है कि उन्होंने औषधियों की शुद्धि और भस्म प्रक्रिया को विस्तार से समझाने के लिए पाठ को दो भागों में विभाजित किया है। आगे वे विभिन्न औषधियों की भस्म प्रक्रिया, गुण और दोषों की चर्चा करेंगे। लेखक ने उल्लेख किया है कि औषधियों के गुणों का अध्ययन करना चुनौतीपूर्ण है और इस कार्य में ज्ञानवान लोगों का योगदान महत्वपूर्ण है। उन्होंने मराठी ग्रंथ "औषधि गुण-धर्म शास्त्र" के लेखक का भी उल्लेख किया है, जिनसे उन्हें प्रेरणा मिली। पाठ में औषधियों से संबंधित त्रुटियों और दोषों के निराकरण की अपेक्षा की गई है। इसके बाद, पाठ में कज्जली नामक औषधि के प्रभावों और उपयोगों का उल्लेख किया गया है। कज्जली के निर्माण की विधि और इसके विभिन्न रोगों में उपयोग की जानकारी दी गई है। विशेष रूप से, यह बताया गया है कि कज्जली का उपयोग विभिन्न प्रकार के रोगों जैसे ज्वर, सूजन, और अन्य चिकित्सा स्थितियों में किया जा सकता है। इसके अलावा, पाठ में विभिन्न धातुओं की शुद्धि के तरीकों का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें सोने और चांदी की शुद्धि के लिए अलग-अलग विधियों का वर्णन किया गया है। लेखक ने यह भी स्पष्ट किया है कि अशुद्ध धातुओं का उपयोग स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है और इसलिए उनका सही तरीके से शुद्ध करना आवश्यक है। कुल मिलाकर, यह पाठ औषधियों और धातुओं की शुद्धि तथा उनके गुणों के विस्तृत विवेचन पर आधारित है, जिसमें चिकित्सा के विभिन्न पहलुओं का ध्यान रखा गया है। लेखक ने इस क्षेत्र में आगे की शोध और अध्ययन के लिए विद्वानों से सहयोग की अपेक्षा की है।
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