गोरख नाथ और उनका युग | Gorakhnath Aur Unka Yug

- श्रेणी: Vedanta and Spirituality | वेदांत और आध्यात्मिकता धार्मिक / Religious साहित्य / Literature
- लेखक: रांगेय राघव - Rangeya Raghav
- पृष्ठ : 280
- साइज: 20 MB
- वर्ष: 1963
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दो शब्द :
पुस्तक का उद्देश्य गोरखनाथ और उनके युग का विस्तृत अध्ययन करना है। लेखक ने गोरखनाथ के व्यक्तित्व और उनके समय की सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक परिस्थितियों का विश्लेषण करने का प्रयास किया है। गोरखनाथ का जीवन और उनके विचार भारतीय सांस्कृतिक इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं, और उनका अध्ययन भारतीय इतिहास के विभिन्न पहलुओं को समझने में सहायक है। लेखक ने यह उल्लेख किया है कि गोरखनाथ के समय की स्थिति को समझने के लिए आवश्यक है कि हम उस समय की सामाजिक और धार्मिक धारणाओं का ज्ञान प्राप्त करें। उनके अनुसार, भारतीय इतिहास को यूरोपीय दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता, क्योंकि भारतीय समाज में सामंती व्यवस्था और धार्मिक तत्व एक साथ जुड़े हुए हैं। गोरखनाथ के विचारों और शिक्षाओं का संबंध केवल धार्मिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक परिवर्तन से भी है। लेखक ने गोरखनाथ से संबंधित विभिन्न ग्रंथों और उनके योगदान का उल्लेख किया है, साथ ही यह भी बताया है कि गोरखनाथ को समझने में विद्वानों ने विभिन्न दृष्टिकोण अपनाए हैं, लेकिन एक समग्र दृष्टिकोण की कमी रही है। लेखक ने यह भी स्वीकार किया है कि गोरखनाथ के विषय में जानकारी सीमित है और उनके योगदान को ठीक से नहीं समझा गया है। इसलिए, उन्होंने गोरखनाथ के व्यक्तित्व और उनके समय के संबंध में एक समग्र दृष्टिकोण प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। इस पुस्तक के माध्यम से लेखक ने गोरखनाथ के विचारों और उनके युग को एक नई रोशनी में प्रस्तुत करने की कोशिश की है, ताकि पाठक गोरखनाथ के महत्व को समझ सकें और उनके योगदान को उचित मान्यता मिल सके।
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