धन्वन्तरि शरीरांक पार्ट-१३ | Dhanvantri Sharirank Part-13

- श्रेणी: Ayurveda | आयुर्वेद
- लेखक: रामप्रसाद - Ramprasad
- पृष्ठ : 326
- साइज: 26 MB
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दो शब्द :
इस पाठ में चिकित्सा के क्षेत्र में आधुनिकता और प्राचीन विज्ञान के बीच की तुलना की गई है। इसमें यह बताया गया है कि चिकित्सा एक बहुत महत्वपूर्ण कार्य है, जो न केवल शरीर की बीमारियों को ठीक करता है, बल्कि समाज में एक चिकित्सक का आदर और मूल्य भी बढ़ाता है। आजकल, चिकित्सा क्षेत्र में कई लोग बिना उचित ज्ञान और अनुभव के डॉक्टर बनने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे पेशेवरता में गिरावट आई है। पाठ में बताया गया है कि एक सच्चा चिकित्सक वह है जो शिक्षा प्राप्त कर, अनुभव हासिल कर और नैतिकता के साथ अपने पेशे को निभाता है। विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों की चर्चा करते हुए, यह भी कहा गया है कि लोग तात्कालिक आराम देने वाली दवाओं और उपचारों की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं, जबकि दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए उचित चिकित्सा पद्धतियों का पालन करना आवश्यक है। इसके अलावा, पाठ में यह भी ध्यान दिलाया गया है कि चिकित्सा विज्ञान में डाक्टरों की जिम्मेदारी है कि वे अपने ज्ञान और अनुभव का उपयोग करके रोगियों का सही उपचार करें। आजकल की चिकित्सा प्रणाली में धन, शक्ति और स्थिति का भी बड़ा योगदान है, जिससे सच्चे चिकित्सकों की पहचान करना कठिन हो गया है। अंततः, पाठ में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि चिकित्सा का कार्य केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवता की सेवा और कल्याण के लिए भी है।
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