आर्योद्देश्य रत्न माला | Aaryoddeshya Ratn Mala

By: दयानंद सरस्वती - Dayanand Saraswati


दो शब्द :

यह पाठ महर्षि दयानन्द सरस्वती द्वारा लिखित विभिन्न लघु ग्रंथों का संकलन है। इसमें "आर्यदिश्य रत्न माला", "गोकरुणा निधि", "पञ्चमहायज्ञ विधि", "व्यवहार भानु" और "आर्याभिविनय" शामिल हैं। यह ग्रंथ वैदिक धर्म के प्रचार हेतु सामान्य जनता के लिए उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पुस्तक का प्रकाशन श्री वीरेन्द्र कुमार आर्य द्वारा उनके माता-पिता की पुण्य स्मृति में किया गया है। इसमें महर्षि दयानन्द के सिद्धांतों और विचारों को प्रस्तुत किया गया है, जो समाज में सुधार और मानवता के उत्थान के लिए प्रेरित करते हैं। लेखक ने महर्षि दयानन्द की शिक्षाओं को जनसामान्य तक पहुँचाने का संकल्प लिया है, जो अनुकरणीय है। ग्रंथों में ईश्वर, धर्म, अधर्म, पुण्य, पाप, सत्य, अविश्वास, परलोक, और अन्य महत्वपूर्ण विषयों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। इस पाठ में महर्षि दयानन्द की शिक्षाओं के महत्व को रेखांकित किया गया है और यह बताया गया है कि कैसे ये शिक्षाएँ समाज के लिए उपयोगी हैं। पाठ का उद्देश्य वैदिक धर्म को समझाना और उसके प्रचार-प्रसार में सहायता करना है। पाठ का समापन श्री वीरेन्द्र कुमार आर्य के माध्यम से महर्षि दयानन्द के आदर्शों को फैलाने की उम्मीद के साथ किया गया है।


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