श्री मार्कण्डेय पुराण | Shri Markandey Puran

- श्रेणी: Hindu Scriptures | हिंदू धर्मग्रंथ धार्मिक / Religious हिंदू - Hinduism
- लेखक: भगवानदास अवस्थी - Bhagwandas Avsthi
- पृष्ठ : 256
- साइज: 7 MB
- वर्ष: 1942
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दो शब्द :
इस पाठ में महाभारत के संबंध में मार्कण्डेय पुराण में उठने वाली पांच शंकाओं का समाधान प्रस्तुत किया गया है। इसे पंचम वेद के रूप में मान्यता दी गई है, जिसमें धर्म के महत्वपूर्ण विषयों का वर्णन है। पाठ में उल्लेख है कि दुर्गा सप्तशती एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसका पाठ करोड़ों हिंदू करते हैं और इसका संबंध मार्कण्डेय पुराण से है। लेखक पं. भगवानदास अवस्थी ने बताया है कि यह ग्रंथ हिंदू धर्म के अध्ययन में महत्वपूर्ण है और इसकी शिक्षाएँ समाज को प्राचीन काल की सफलताओं और विफलताओं के कारणों को समझने में मदद कर सकती हैं। पाठ में यह भी बताया गया है कि यदि हिंदू जनता अपने पूर्वजों की सफलताओं और विफलताओं को समझ सके और धार्मिकता के नाम पर प्रचलित रुढ़ियों से दूर रह सके, तो वे धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक उन्नति की ओर अग्रसर हो सकते हैं। पाठ में महाभारत की कथा से जुड़े कई प्रसंगों का उल्लेख किया गया है और यह बताया गया है कि यह ग्रंथ सभी शास्त्रों में सर्वोच्च है, जिसमें जीवन के सभी पहलुओं का समावेश है। मार्कण्डेय जी की कथा में विभिन्न महत्वपूर्ण पात्रों और घटनाओं का वर्णन किया गया है, जैसे ऋषि जेमिनि का प्रश्न करना, दुर्वासा जी का शाप, पक्षियों के युद्ध, और अन्य धार्मिक और नैतिक शिक्षाएँ। इस प्रकार, पाठ में न केवल महाभारत की कथा का महत्व बताया गया है, बल्कि इसके अध्ययन से प्राप्त होने वाले ज्ञान और उसके सामाजिक प्रभावों पर भी प्रकाश डाला गया है।
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