बंधन महासमर-१ | Bandhan Mahasamar -1

By: नरेन्द्र कोहली - Narendra kohli
बंधन महासमर-१ | Bandhan Mahasamar -1 by


दो शब्द :

इस पाठ का सारांश इस प्रकार है: "बन्धन" शीर्षक में देवब्रत, जो हस्तिनापुर के युवराज हैं, और दासराज, जो एक केवट हैं, के बीच संवाद का वर्णन है। दासराज अपनी पुत्री सत्यवती के लिए एक अच्छे पति की तलाश में हैं, और वे चाहते हैं कि सत्यवती का पति उसके साथ न्यायपूर्ण हो। दासराज का मानना है कि सत्यवती का विवाह राजा शान्तनु से नहीं होना चाहिए, क्योंकि युवराज पहले से ही उपस्थित हैं और उनका अधिकार है कि वे राज्य के स्वामी बनें। देवब्रत, दासराज की चिंताओं को सुनते हैं और उन्हें आश्वस्त करते हैं कि सत्यवती का पुत्र हस्तिनापुर का युवराज होगा। दासराज चिंतित हैं कि देवब्रत विवाह के बाद अपने पुत्रों को अधिकार देंगे, लेकिन देवब्रत ने प्रतिज्ञा की है कि वे आजीवन अविवाहित रहेंगे और अपने राज्य का अधिकार नहीं छोड़ेंगे। वास्तव में, देवब्रत ने अपने जीवन के सुख को त्यागने का निर्णय लिया है ताकि सत्यवती और उसके पुत्र को कोई कठिनाई न हो। वे दासराज को आश्वस्त करते हैं कि उनके पुत्र कभी भी अपने अधिकार की मांग नहीं करेंगे। अंत में, दासराज देवब्रत की महानता को समझते हैं और अपनी बेटी का विवाह शान्तनु से करने के लिए सहमत होते हैं। इस प्रकार, यह पाठ त्याग, बलिदान, और एक उच्च नैतिकता का उदाहरण प्रस्तुत करता है, जिसमें देवब्रत अपने व्यक्तिगत सुख को छोड़कर दासराज और उनकी पुत्री के भविष्य को प्राथमिकता देते हैं।


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