भारत में’ विवेकानद | Bharat Me Vivekanand

By: स्वामी विवेकानंद - Swami Vivekanand


दो शब्द :

इस पाठ में स्वामी विवेकानंद का कोलम्बो में दिया गया व्याख्यान प्रस्तुत किया गया है। वे अपने अनुभवों और विचारों के माध्यम से भारत की महानता और आध्यात्मिकता को उजागर कर रहे हैं। स्वामीजी ने बताया कि उनके द्वारा किए गए कार्य असल में एक अंतर्निहित शक्ति द्वारा संभव हुए हैं, जो उनके मातृभूमि भारत की पवित्रता और वहां की संस्कृति से उत्पन्न हुई है। स्वामी विवेकानंद ने भारत को पुण्यभूमि बताते हुए कहा कि यह वही देश है जहाँ मानवता के लिए शांति, सद्भावना, और आध्यात्मिकता का विकास हुआ है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत ही वह स्थान है जहाँ से विश्व के अन्य देशों को ज्ञान और आध्यात्मिकता की धारा प्रवाहित हुई है। वे यह स्पष्ट करते हैं कि जबकि अन्य देशों ने युद्ध और रक्तपात के माध्यम से अपने विचारों का प्रचार किया, भारत ने शांति और सहिष्णुता के साथ अपने विचारों का प्रसार किया है। स्वामीजी भारत की प्राचीनता और स्थिरता की प्रशंसा करते हैं और बताते हैं कि भारत ने हजारों वर्षों से अपने मूल्यों और संस्कृति को बनाए रखा है। स्वामी विवेकानंद ने यह भी कहा कि भारत में धर्म का अर्थ जीवन का मुख्य उद्देश्य है, जबकि अन्य देशों में धर्म केवल एक कार्य के रूप में देखा जाता है। वे यह विश्वास व्यक्त करते हैं कि भारत विश्व को आध्यात्मिकता की ओर ले जाएगा और यह संपूर्ण मानवता के लिए ज्ञान और शांति का स्रोत बनेगा। इस प्रकार, स्वामी विवेकानंद के विचारों में भारत की महान सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर को उजागर किया गया है, जो उन्हें गर्व का अनुभव कराता है और वे इसे विश्व के सामने प्रस्तुत करने का प्रयास करते हैं।


Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *