नवरत्न विवाह पद्धति | Nav Ratan Vivah Paddhati

- श्रेणी: ज्योतिष / Astrology श्लोका / shlokas संस्कृत /sanskrit
- लेखक: अज्ञात - Unknown
- पृष्ठ : 297
- साइज: 9 MB
- वर्ष: 1937
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दो शब्द :
इस पाठ में विवाह पद्धति और संबंधित विधियों का विस्तृत वर्णन किया गया है। इसमें विभिन्न प्रकार के विवाहों, उनकी शुद्धि, अनुष्ठान, और ज्योतिष संबंधी मानदंडों पर चर्चा की गई है। पहले प्रकरण में विवाह के समय शुभ-शुभ ग्रहों की स्थिति और उनके प्रभाव का विश्लेषण किया गया है। विभिन्न प्रकार के विवाह जैसे पिप्पलविवाह, कुंभविवाह, और अच्युतविवाह के विधान और उनके साथ जुड़े मंत्रों का उल्लेख किया गया है। दूसरे प्रकरण में विवाह के दौरान की जाने वाली Rituals और सामग्री का विवरण है जैसे कि तिलक, मंडप सजाना, और पूजा विधि। तीसरे प्रकरण में विवाह के समय की जाने वाली शांति और पूजन विधियों का वर्णन किया गया है। चौथे प्रकरण में संकल्प और विवाह के अन्य अनुष्ठानों का विवरण दिया गया है, जिनमें यजमान और कन्या के बीच के संकल्प शामिल हैं। पाठ में विवाह के बाद के कर्तव्यों, रजस्वला स्थिति में कर्तव्यों, और आवश्यकताओं का भी उल्लेख है। विशेष रूप से, यह बताया गया है कि विवाह में किसी भी प्रकार की अशुद्धि से बचने के लिए क्या उपाय करने चाहिए। अंत में, विवाह पद्धति की शुद्धता और उसके पालन की आवश्यकता पर जोर दिया गया है, ताकि समाज में उचित मानदंडों के अनुसार विवाह सम्पन्न हो सकें। इस प्रकार, यह पाठ विवाह पद्धति के सभी पहलुओं को समाहित करता है, जिसमें धार्मिक, सामाजिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण शामिल हैं।
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