अनुसंधान की प्रक्रिया | Anusandhan Ki Prakriya

By: डॉ. सावित्री सिन्हा - Dr. savitri sinha
अनुसंधान की प्रक्रिया | Anusandhan Ki Prakriya by


दो शब्द :

यह पाठ "अनुसंधान की प्रक्रिया" शीर्षक से संबंधित है, जो कि हिन्दी अनुसंधान परिषद् द्वारा प्रकाशित एक ग्रंथ है। इस ग्रंथ का उद्देश्य हिन्दी भाषा और साहित्य के क्षेत्र में अनुसंधान की प्रक्रिया और प्रविधियों का विवेचन करना है। यह हिन्दी अनुसंधान परिषद्, जो कि दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के अधीन स्थापित की गई थी, का बीसवां ग्रंथ है। ग्रंथ में अनुसंधान के विभिन्न पहलुओं का वर्णन किया गया है, जिसमें प्राचीन काव्यशास्त्र, हिन्दी नाटक, सूफी साहित्य और अन्य विषयों पर शोध कार्य शामिल हैं। परिषद् ने अनुसंधान की प्रक्रिया को समझने के लिए विभिन्न विद्वानों के लेखों को समाहित किया है, जिससे शोधार्थियों को मार्गदर्शन प्राप्त हो सके। पाठ में यह बताया गया है कि अनुसंधान की प्रक्रिया में विषय-निर्वाचन, सामग्री-संकलन, पाठानुसंधान और भाषा-विज्ञानिक अध्ययन जैसे कई महत्वपूर्ण चरण शामिल होते हैं। इसके साथ ही, यह भी उल्लेख किया गया है कि अनुसंधान के क्षेत्र में कई समस्याएँ हैं, जिन्हें हल करने की आवश्यकता है। इन समस्याओं का समाधान करने के लिए परिषद् ने एक अनुसंधान गोष्ठी का आयोजन किया, जिसमें शोधार्थियों को मार्गदर्शन देने के लिए विषय विशेषज्ञों द्वारा भाषण दिए गए। गोष्ठी के दौरान विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई, जैसे कि अनुसंधान की प्रगति, साहित्यिक अनुसंधान के प्रकार, शोध सामग्री का संकलन और पाठानुसंधान की प्रक्रिया। पाठ में व्यक्त की गई विभिन्न समस्याओं और उनके समाधान की दिशा में सुझाव दिए गए हैं, जिससे अनुसंधान के कार्य को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। इस प्रकार, यह ग्रंथ हिन्दी अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जो शोधार्थियों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा।


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