श्राद्ध विधि प्रकरण | Shraddha vidhi prakaran

By: तिलक विजय पंजाबी - Tilak Vijay Punjabi
श्राद्ध विधि प्रकरण  | Shraddha  vidhi prakaran by


दो शब्द :

यह पाठ एक धार्मिक ग्रंथ का अनुवाद और उसके महत्व के बारे में है। इसमें जैन धर्म के श्रावकों के लिए श्राद्ध विधि की व्याख्या की गई है। अनुवादक तिलक विजय पंजाबी ने इसे हिंदी में प्रस्तुत किया है ताकि जैन धर्म के अनुयायियों को अपने धर्म के आचार और विचारों को समझने में आसानी हो सके। लेख में जैन समाज की धार्मिक क्रियाओं और उनके महत्व पर जोर दिया गया है। यह बताया गया है कि गुजरात में जैन धर्म के आचारों का प्रचार अधिक प्रभावी है, जबकि अन्य क्षेत्रों में हिंदी में साहित्य की कमी है। इसलिए, अनुवादक ने यह ग्रंथ हिंदी में अनुवादित किया है ताकि अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। ग्रंथ के रचनाकार रतनशेखर सूरी हैं, जिन्होंने प्राकृत में श्राद्ध विधि पर ग्रंथ लिखा था। इस ग्रंथ में धार्मिक क्रियाओं के करने के विधि-विधान का विस्तार से वर्णन किया गया है, जिससे पाठक अपने कर्तव्यों और धार्मिक कार्यों को सही ढंग से समझ सकें। अनुवादक ने यह भी उल्लेख किया है कि उन्होंने अनुवाद के दौरान कई कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन अंततः उन्होंने इसे प्रकाशित करने का प्रयास किया। पाठ में जैन धर्म के प्रति अनुवादक की श्रद्धा और समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी का भी उल्लेख है। कुल मिलाकर, यह पाठ जैन धर्म के आचार-विचार और धार्मिक क्रियाकलापों के प्रचार की आवश्यकता को उजागर करता है, साथ ही अनुवादक की मेहनत और समर्पण को दर्शाता है।


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