प्राणायाम अर्थात श्वास विज्ञान | Pranayaam Arthart Swash Vigyan

- श्रेणी: Health and Wellness | स्वास्थ्य धारणा और ध्यान/ Concentration and Meditation योग / Yoga
- लेखक: श्रीदुलारेलाल भार्गव - Shridularelal Bhargav
- पृष्ठ : 144
- साइज: 3 MB
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दो शब्द :
इस पाठ में "प्राणायाम" नामक पुस्तक का प्रकाशन और उसका महत्व बताया गया है। पुस्तक के लेखक योगी रामाचारक हैं, जिन्होंने इस विषय पर पश्चिमी दृष्टिकोण से लिखा है। भूमिका में लेखक ने यह उल्लेख किया है कि कैसे उन्होंने प्राणायाम का अभ्यास प्रारंभ किया और इसके द्वारा अपने स्वास्थ्य में सुधार पाया। राजर्षि उद्यप्रतापसिंह ने लेखक को योग और प्राणायाम के महत्व के बारे में बताया था। लेखक ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि कैसे प्राणायाम से न केवल शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार हुआ, बल्कि मानसिक स्थिति में भी सकारात्मक बदलाव आया। लेखक ने यह भी बताया कि भारतीय समाज में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं आम हैं और प्राणायाम के माध्यम से उन्हें हल किया जा सकता है। उन्होंने यह विश्वास व्यक्त किया कि इस पुस्तक के माध्यम से लोग प्राचीन योग विद्या को समझेंगे और उससे लाभान्वित होंगे। अंत में, लेखक ने यह आशा व्यक्त की है कि यह पुस्तक पाठकों को प्राणायाम की शिक्षा देकर उनके जीवन में स्वास्थ्य और सुख लाने में सहायक होगी।
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