धर्म शिक्षा | Dharm Shiksha

By: लक्ष्मीधर वाजपेयी - Laxmidhar Vajpeyi
धर्म शिक्षा  | Dharm Shiksha by


दो शब्द :

इस पाठ का सारांश इस प्रकार है: पुस्तक "धर्मशिक्षा" के प्रकाशन और उसके महत्व पर चर्चा की गई है। लेखक लक्ष्मीधर वाजपेयी ने उल्लेख किया है कि वर्तमान समय में देश में धार्मिक शिक्षा की आवश्यकता है। उन्होंने पश्चिमी शिक्षा प्रणाली में धार्मिक और नैतिक शिक्षा की कमी की ओर ध्यान आकर्षित किया है, जिसके कारण विद्यार्थियों में सदाचार और नीति का विकास नहीं हो पा रहा है। लेखक ने हिन्दू धर्म के विद्यार्थियों के लिए एक पुस्तक लिखने की इच्छा व्यक्त की, जिसे उनके मित्र सरदार नमेंदा प्रसाद सिंह ने प्रेरित किया। पुस्तक के निर्माण में विभिन्न हिन्दू ग्रंथों का अवलोकन किया गया है, और इसमें धार्मिक शिक्षाओं का संक्षिप्त वर्णन किया गया है। लेखक ने यह भी बताया कि पुस्तक में किसी भी मतभेद का उल्लेख नहीं किया गया है और वह केवल सच्चे धर्म का निरूपण करने का प्रयास कर रहे हैं। पुस्तक की पहली आवृत्ति की सफलता के बाद, इसके कई संस्करण निकाले गए हैं। लेखक ने पाठकों और विद्वानों से पुस्तक में त्रुटियों के बारे में सूचित करने की अपील की है। उन्होंने यह भी कहा कि पुस्तक में विधियों का समावेश नहीं किया गया है, क्योंकि यह पुस्तक धर्म का सिद्धांत समझाने के लिए है। लेखक ने उम्मीद जताई है कि पुस्तक से धार्मिक शिक्षा का प्रचार होगा और यह हिन्दू धर्म के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। पाठ में यह भी बताया गया है कि पुस्तक की मांग बढ़ रही है और इसे विभिन्न पाठशालाओं में पढ़ाया जा रहा है। इस प्रकार, लेखक ने धार्मिक शिक्षा पर जोर देते हुए पुस्तक के महत्व और उसके प्रचार की आवश्यकता को स्पष्ट किया है।


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