प्राचीन भारतीय अभिलेख संग्रह खण्ड-1 | Prachin Bhartiya Abhilekh Sangrah Khand -1

- श्रेणी: Cultural Studies | सभ्यता और संस्कृति इतिहास / History भारत / India
- लेखक: श्रीराम गोयल - Shreeram Goyal
- पृष्ठ : 756
- साइज: 30 MB
- वर्ष: 1970
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दो शब्द :
इस पाठ का सारांश इस प्रकार है: पुस्तक "प्राचीन भारतीय अभिलेख संग्रह" का उद्देश्य प्राचीन भारतीय अभिलेखों का अध्ययन करना है, जिसमें मूल पाठ, अनुवाद और व्याख्या शामिल हैं। यह पुस्तक विशेष रूप से स्नातकोत्तर स्तर के छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें प्राचीन अभिलेखों का संपूर्ण विवरण दिया गया है। लेखक डॉ. श्रीराम गोयल ने इस ग्रंथ में प्राचीन गुप्तयुगीन अभिलेखों का विश्लेषण किया है और इसे हिंदी में प्रस्तुत किया है ताकि छात्रों को अध्ययन में आसानी हो। पुस्तक की भूमिका में प्रो. ए. एल. बेशम ने भारतीय अभिलेखों के महत्व को रेखांकित किया है, यह बताते हुए कि भारत में प्राचीन इतिहास के निर्माण में अभिलेखों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि अन्य देशों की तुलना में भारत में अभिलेखों की संख्या और महत्व अधिक है। लेखक ने पुस्तक में अभिलेखों के मूल पाठ, उनके अनुवाद, और महत्त्वपूर्ण शब्दों पर टिप्पणियाँ शामिल की हैं, जिससे छात्रों को अभिलेखों को समझने में मदद मिलेगी। इस ग्रंथ का उद्देश्य न केवल अभिलेखों को सुलभ बनाना है, बल्कि छात्रों और शोधकर्ताओं को प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोतों के अध्ययन में सहायता प्रदान करना भी है। पुस्तक में अभिलेखों के विवादास्पद पाठों के विभिन्न प्रस्तावित संस्करण भी शामिल हैं, जिससे शोधकर्ताओं को अपने अध्ययन में मदद मिलेगी। संक्षेप में, यह पुस्तक भारतीय इतिहास के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण संसाधन है और इसे उन सभी के लिए अनुशंसित किया गया है जो भारत के अतीत को गंभीरता से जानना चाहते हैं।
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