तर्क भाषा | Tarka Bhasa

- श्रेणी: दार्शनिक, तत्त्वज्ञान और नीति | Philosophy भारत / India
- लेखक: पं. श्री रुद्रधर झा - Pt. Shri Rudradhara Jha
- पृष्ठ : 230
- साइज: 10 MB
- वर्ष: 1953
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दो शब्द :
इस पाठ में न्यायशास्त्र और तत्त्वज्ञान के मूलभूत सिद्धांतों का विवरण दिया गया है। इसमें प्रमाण, सिद्धांत, और उनके प्रयोजनों की व्याख्या की गई है। न्यायशास्त्र में विभिन्न प्रकार के प्रमाणों की चर्चा की गई है, जैसे प्रत्यक्ष, अनुमान, और उपमान। इसके साथ ही, सिद्धांतों के आधार पर तर्क और विचारों का विश्लेषण किया गया है, ताकि उचित निर्णय लिया जा सके। पाठ में यह बताया गया है कि ज्ञान की सही प्राप्ति के लिए उद्देश, लक्षण, और परीक्षा की आवश्यकता होती है। इसमें यह भी स्पष्ट किया गया है कि ज्ञान केवल श्रवण, मनन, और निदिध्यासन के माध्यम से ही नहीं, बल्कि साक्षात् अनुभव के माध्यम से भी प्राप्त किया जा सकता है। इसके अलावा, न्यायशास्त्र में विभिन्न प्रकार के तर्कों और उनकी उपयोगिता पर भी चर्चा की गई है, जिससे यह सिद्ध होता है कि तर्क और प्रमाणों का सही उपयोग कैसे किया जाए। पाठ के अंत में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि न्यायशास्त्र केवल ज्ञान का एक माध्यम नहीं है, बल्कि यह जीवन में निर्णय लेने की प्रक्रिया को भी प्रभावित करता है। इस प्रकार, यह पाठ न्याय और तत्त्वज्ञान के गहन अध्ययन के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
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