ब्रह्मसूत्र शंकर भाष्य -रत्नप्रभा भाषानुवाद सहित | hmasutra Shankar Bhashya - Ratnaprabha Bhashanuvad Sahit

By: चण्डीप्रसाद शुक्ल - Chandiprasad Shukla


दो शब्द :

इस पाठ का सारांश इस प्रकार है: यह पाठ एक विद्वान् द्वारा संपादित ग्रंथ का परिचय है, जिसमें वेदांत के विभिन्न विषयों का चर्चा किया गया है। इसमें शास्त्रीय तत्त्वों, सूत्रों और उनके अर्थों का उल्लेख किया गया है। पहले अध्याय में विद्या, ब्रह्म और आत्मा के संबंध में विभिन्न विमर्श किए गए हैं। यह ग्रंथ उन तत्वों और सिद्धांतों को प्रस्तुत करता है जो भारतीय दर्शन के अंतर्गत आते हैं, विशेष रूप से अद्वैत वेदांत की दृष्टि से। ग्रंथ में विभिन्न अधिकरणों (विभागों) के माध्यम से ब्रह्म, आत्मा, और जगत के संबंध में गहन विचार प्रस्तुत किए गए हैं। प्रत्येक अधिकरण में तर्क, प्रमाण और प्रमाणात्मक दृष्टिकोण से विषयों का विवेचन किया गया है। पाठ में उपनिषदों और अन्य शास्त्रों से उद्धरण देकर विचारों को पुष्ट किया गया है। इस पाठ का मुख्य उद्देश्य वेदांत के सिद्धांतों को स्पष्ट करना और उनके महत्व को रेखांकित करना है, ताकि पाठक को आत्मा, ब्रह्म और जगत के संबंध में गहरी समझ प्राप्त हो सके।


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