नगरीय समाजशास्त्रीय | Urban Sociology

By: पी. एन. खरे - P.N. Khare


दो शब्द :

इस पाठ में नगरीय समाजशास्त्र का परिचय और महत्व प्रस्तुत किया गया है। लेखक पी. एन. खरे ने नगरीय समाजशास्त्र को नगरों के सामाजिक संबंधों का अध्ययन करने वाला विज्ञान बताया है। यह विषय विशेष रूप से नगर के जीवन, सामाजिक क्रियाओं, और संस्थाओं पर केंद्रित है। लेखक ने विभिन्न विद्वानों की परिभाषाओं का उल्लेख किया है, जिसमें ई. ई. बर्गेल और लॉरी नेल्सन की परिभाषाएँ शामिल हैं। नगरीय जीवन के विशेष पहलुओं, जैसे कि औद्योगीकरण, नगरीकरण, सामाजिक असमानता, और अपराध की समस्याओं पर भी चर्चा की गई है। पुस्तक में नगरीय जीवन की विशेषताएँ और इसके विकास की प्रक्रिया को विस्तार से बताया गया है। इसमें यह भी बताया गया है कि कैसे नगरीकरण और औद्योगीकरण ने अनेक सामाजिक समस्याओं को जन्म दिया, जैसे गंदी बस्तियाँ, भिक्षावृत्ति, और वेश्यावृत्ति। लेखक ने नगरीय समाजशास्त्र के विकास में विभिन्न विद्वानों के योगदान का उल्लेख किया है, और इस विषय की प्रासंगिकता को समझाया है। अंत में, लेखक ने पुस्तक के निर्माण में सहयोग देने वाले सभी व्यक्तियों का आभार प्रकट किया है और सुझावों का स्वागत किया है। इस प्रकार, यह पाठ नगरीय समाजशास्त्र की आधारभूत जानकारी प्रदान करता है और इसे अध्ययन करने वाले छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री के रूप में काम करेगा।


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