क़ुरान पारा | Quraan Para

- श्रेणी: Islamic | इस्लामी उर्दू / Urdu
- लेखक: अज्ञात - Unknown
- पृष्ठ : 29
- साइज: 16 MB
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दो शब्द :
इस पाठ में अल्लाह के आदेश और धार्मिक अनुशासन के बारे में निर्देश दिए गए हैं। इसमें बताया गया है कि सच्चे ईमान वाले लोग अपनी प्रिय चीजों में से अल्लाह की राह में खर्च करें, क्योंकि अल्लाह उनके कार्यों को जानता है। यह भी उल्लेख किया गया है कि तोरत के पहले बनी इसराईल के लिए हर चीज हलाल थी, सिवाय उन चीजों के जो याकूब ने अपने ऊपर हराम कर ली थीं। पाठ में ईमान वालों को इस्लाम के पैगंबर इब्राहीम के धर्म का अनुसरण करने की सलाह दी गई है, और मक्का के पहले घर (काबा) की महानता का वर्णन किया गया है, जो समस्त मानवता के लिए हिदायत का केंद्र है। अल्लाह की आयतों के प्रति आस्था और ईमान की रक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। ईमान वालों को यह चेतावनी दी गई है कि यदि वे अहले किताब के किसी गिरोह की बात मानते हैं, तो वे फिर से कुफ्र की ओर लौट सकते हैं। इस्लाम के अनुयायियों को एकजुट रहने और एक-दूसरे के साथ भाईचारा बनाए रखने की सलाह दी गई है। पाठ में यह भी कहा गया है कि भलाई का आदेश देने और बुराई से रोकने वाले लोग ही सफल हैं। इसके अलावा, अल्लाह के प्रति ईमान और उसकी मार्गदर्शक आयतों की तिलावत करने वालों की प्रशंसा की गई है। इसके अंत में, यह बताया गया है कि जिन लोगों ने अल्लाह और उसके पैगंबर का इनकार किया, उनके लिए सख्त सजा है, जबकि ईमान वालों को अल्लाह की रहमत प्राप्त होगी। अल्लाह ने ईमान वालों को उनकी कठिनाइयों में मदद की और उन्हें विजय दिलाई, जैसे कि बद्र की लड़ाई में। सारांश रूप में, यह पाठ धार्मिक आस्था, एकता, भलाई के कार्यों और अल्लाह की मदद पर जोर देता है, साथ ही यह चेतावनी भी देता है कि जो लोग अल्लाह की आयतों का इन्कार करते हैं, उनका अंत बुरा होगा।
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