स्कन्द पुराण ( प्रथम खंड) | Skand Puran (vol. 1)

By: श्रीराम शर्मा आचार्य - Shri Ram Sharma Acharya


दो शब्द :

इस पाठ में स्कन्दपुराण के महत्व और उसमें वर्णित विभिन्न धार्मिक विचारों का उल्लेख किया गया है। इसमें भगवान ब्रह्मा, विष्णु और महादेव (शिव) की महिमा, उनके भक्ति मार्ग, और उनके प्रति भक्तों का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया गया है। यह बताया गया है कि कैसे विभिन्न सम्प्रदायों में इन देवताओं की पूजा की जाती है और उनकी तुलना में भेदभाव नहीं होना चाहिए। पाठ में यह भी कहा गया है कि पुराणों में सभी देवताओं को समान रूप से प्रतिष्ठित किया गया है और उनके प्रति की जाने वाली भक्ति का महत्व बताया गया है। भक्तों के लिए यह आवश्यक है कि वे परस्पर एकता बनाए रखें और किसी भी प्रकार के धार्मिक भेदभाव से बचें। यह उल्लेखित किया गया है कि भगवान विष्णु और शिव की उपासना में कोई अंतर नहीं है, और भक्तों को दोनों की कृपा प्राप्त होती है। इसके अलावा, यह भी दर्शाया गया है कि विभिन्न संतों और मुनियों ने एकता और समर्पण का मार्ग अपनाया है, जिससे सभी भक्तों को एक समान दर्जा दिया गया है। अंत में, पाठ में यह प्रेरणा दी गई है कि सभी भक्त एकजुट होकर भगवान की भक्ति करें और किसी भी प्रकार की कटुता या निंदा से दूर रहें। सभी देवताओं की महिमा का समान रूप से गुणगान करना चाहिए और भक्ति के मार्ग पर चलकर मोक्ष की प्राप्ति के लिए प्रयासरत रहना चाहिए।


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