प्राचीन भारतीय गणित | Prachin Bhartiya Ganit

By: डॉ ब. ल. उपाध्याय - Dr. B. L. Upadhyay


दो शब्द :

इस पाठ में प्राचीन भारतीय गणित के अध्ययन का वर्णन किया गया है, जिसमें गणित, संस्कृत और हिंदी का ज्ञान आवश्यक बताया गया है। लेखक ने अपने स्वास्थ्य की समस्याओं और कठिनाइयों का उल्लेख किया है, जिनके बावजूद उन्होंने इस कार्य को पूरा किया। पाठ में विभिन्न विद्वानों का उल्लेख किया गया है जिन्होंने इस क्षेत्र में योगदान दिया है, जैसे डॉ. बी.बी. दत्त और महावीराचार्य। लेखक ने प्राचीन भारतीय गणित के इतिहास की चर्चा की है, जिसमें वेदों, ज्योतिष और गणित के विकास का संक्षिप्त विवरण दिया गया है। विभिन्न ग्रंथों और उनके रचनाकारों का उल्लेख करते हुए, भारतीय गणित की विशेषताओं और सिद्धांतों का वर्णन किया गया है। उदाहरण के लिए, पाइथागोरस प्रमेय का उल्लेख है, जो शुल्ब-काल से भारत में ज्ञात था, और इसे ब्रह्मगुप्त ने विस्तृत रूप से वर्णित किया। महावीराचार्य के योगदान और उनके द्वारा स्थापित सिद्धांतों का भी उल्लेख किया गया है। पाठ में यह भी वर्णन है कि किस प्रकार भारतीय गणित का उत्कर्ष युग भास्कर की मृत्यु के साथ समाप्त हो गया और उसके बाद गणित में मौलिक रचनाएं कम होने लगीं। मुस्लिम विजय के प्रभाव से गणित की प्रगति में रुकावट आई, जबकि दक्षिण भारत में सांस्कृतिक गतिविधियां जारी रहीं। अंत में, लेखक ने आधुनिक संदर्भ में प्राचीन गणितीय सिद्धांतों की प्रासंगिकता और उनके सांस्कृतिक महत्व पर विचार किया है। यह अध्ययन भारतीय गणित के समृद्ध इतिहास और उसके विकास में महत्वपूर्ण योगदान को उजागर करता है।


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