उदयपुर राज्य का इतिहास ( पहली जिल्द ) | Udaipur Rajya ka itihas ( pahli Jild )

- श्रेणी: इतिहास / History धार्मिक / Religious
- लेखक: महामहोपाध्याय राय बहादुर पंडित गौरीशंकर हीराचन्द्र ओझा - Mahamahopadhyaya Rai Bahadur Pandit Gaurishankar Hirachand Ojha
- पृष्ठ : 533
- साइज: 275 MB
- वर्ष: 1938
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दो शब्द :
यह पाठ इतिहास के महत्व और विशेष रूप से मेवाड़ राज्य के इतिहास पर केंद्रित है। लेखक ने यह बताया है कि किसी भी राष्ट्र या जाति की उन्नति के लिए अपने इतिहास को समझना और उसका निर्माण करना आवश्यक है। इतिहास न केवल अतीत की घटनाओं को दर्शाता है, बल्कि यह भविष्य के लिए मार्गदर्शन भी प्रदान करता है। राजपूताने का इतिहास, विशेषकर मेवाड़ का, वीरता, त्याग और स्वतंत्रता प्रेम की कहानियों से भरा हुआ है। मेवाड़ राज्य ने लंबे समय तक विदेशी आक्रमणों का सामना किया और अपने स्वतंत्रता की लड़ाई जारी रखी। लेखक ने महाराणा प्रताप को स्वतंत्रता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया है, जिन्होंने अपने राज्य की रक्षा के लिए कई लड़ाइयाँ लड़ीं। पाठ में उल्लेखित है कि मेवाड़ का इतिहास केवल प्राचीनता में ही नहीं, बल्कि स्वतंत्रता के लिए संघर्ष में भी महत्वपूर्ण है। मेवाड़ के राजाओं ने मुगलों और अन्य आक्रमणकारियों के खिलाफ अपनी स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए संघर्ष किया। लेखक ने यह भी बताया कि मेवाड़ के राजवंश की प्राचीनता और गौरव को कई ऐतिहासिक स्रोतों से प्रमाणित किया जा सकता है। अंत में, यह पाठ यह स्पष्ट करता है कि मेवाड़ का इतिहास न केवल एक राष्ट्र की पहचान है, बल्कि यह उसके गर्व और स्वतंत्रता की भावना को भी उजागर करता है। इतिहास की इस समझ के माध्यम से, समाज को अपने कर्तव्यों का ज्ञान मिलता है और वे अपने अतीत से प्रेरणा लेते हैं।
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