संभाजी | Sambhaji

By: रामजी तिवारी - Dr. Ramji Tiwari
संभाजी | Sambhaji by


दो शब्द :

"सम्भाजी" एक ऐतिहासिक उपन्यास है, जिसमें गोदू नामक एक युवा महिला की कहानी प्रस्तुत की गई है। उपन्यास की शुरुआत एक ठंडी रात के दृश्य से होती है, जहाँ गोदू अपने पति निवासराव की अनुपस्थिति से चिंतित है। उसकी शादी को एक महीना ही हुआ है, और वह अपने पति को खोने के डर में है। गोदू के ससुर ज्यम्बकराव और अन्य व्यक्तियों के बीच एक गुप्त मंत्रणा चल रही है, जिसमें एक बड़ा षड्यंत्र रचा जा रहा है, जिसका लक्ष्य छत्रपति शिवाजी महाराज को मारना है। गोदू का मायका पिछड़े गाँव में है, लेकिन उसका व्यावहारिक ज्ञान और साहस उल्लेखनीय है। उसका मौसा, अण्णाजी दत्तो, शिवाजी महाराज के प्रशासन में महत्वपूर्ण पद पर था। गोदू की शिवाजी महाराज के प्रति अपार भक्ति है और वह उनके लिए अपने प्राणों तक की परवाह नहीं करती। उपन्यास में तानाजी भालुसरे की शहादत की घटना का भी उल्लेख है, जिसने गोदू को गहरे तरीके से प्रभावित किया है। गोपनीय वार्ता में ज्यम्बकराव ने बताया कि एक योजना बनाई गई है, जिसमें शिवाजी महाराज की हत्या करने के लिए एक हमला किया जाएगा। इस षड्यंत्र को सुनकर गोदू भयभीत हो जाती है और तुरंत ही अपने पति को चेताने के लिए घोड़े पर सवार होकर रायगढ़ की ओर भाग जाती है। उपन्यास में गोदू की साहसिकता और उसकी देशभक्ति की भावना को उजागर किया गया है, जो एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संदर्भ के साथ जुड़ी हुई है। इस प्रकार, "सम्भाजी" उपन्यास न केवल व्यक्तिगत संघर्षों और साहस की कहानी है, बल्कि यह उस समय की राजनीतिक और सामाजिक चुनौतियों को भी दर्शाता है, जब मराठा साम्राज्य अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा था।


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