कृत्तिवास रामायण [ लंका कांड] | Krittivas Ramayana [ Lanka Kand ]
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- श्रेणी: Hindu Scriptures | हिंदू धर्मग्रंथ धार्मिक / Religious पौराणिक / Mythological
- लेखक: कृत्तिवास ओझा - Krittibas Ojha
- पृष्ठ : 490
- साइज: 163 MB
- वर्ष: 1973
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दो शब्द :
इस पाठ में भाषा, वाणी और लिपि के महत्व पर चर्चा की गई है। यह बताया गया है कि मन के भावों और विचारों को प्रकट करने के लिए वाणी का उपयोग होता है, और जब इसे लिखित रूप में प्रस्तुत किया जाता है, तो यह लिपि के रूप में परिणत होती है। पाठ में यह भी उल्लेख किया गया है कि मानव जाति की उत्पत्ति और विकास के संबंध में विभिन्न मत हैं, लेकिन भारतीय दृष्टिकोण के अनुसार सभी मानव मनु या आदम की संतान हैं। भारत में विभिन्न भाषाएँ और बोलियाँ हैं, जिनका मूल एक ही है। पाठ में बताया गया है कि भारतीय भाषाओं के बीच में बहुत समानता है, जैसे कि व्याकरण और शब्दावली में। उर्दू को हिंदी से अलग मानना भी एक भूल है, क्योंकि दोनों का संबंध बहुत गहरा है। इसके अलावा, पाठ में यह भी कहा गया है कि देवनागरी लिपि के माध्यम से भारत की विभिन्न भाषाओं और साहित्य को फैलाना आवश्यक है ताकि विभिन्न क्षेत्रीय संस्कृतियों को एकजुट किया जा सके। बंगाल की भाषा और संस्कृति का भी विशेष जिक्र किया गया है, जिसमें बंगाल के साहित्यिक और सांस्कृतिक योगदान को सराहा गया है। पाठ में बंगला भाषा के वर्णमाला और उच्चारण के कुछ बिंदुओं का भी उल्लेख किया गया है। समग्रतः, यह पाठ भाषा की विविधता, एकता और सांस्कृतिक समृद्धि के महत्व को उजागर करता है।
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