मन और उसका निग्रह (भाग २) | Man Aur Uska Nigrah (part - 2)

By: श्री स्वामी शिवानन्द सरस्वती - Shri Swami Shivanand Sarasvati


दो शब्द :

इस पाठ का सारांश इस प्रकार है: इस पाठ में मन और उसके विचारों का शरीर पर प्रभाव बताया गया है। लेखक ने यह स्पष्ट किया है कि मन के विचार सीधे तौर पर हमारे शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। अगर मन में नकारात्मक भावनाएँ जैसे ईर्ष्या, क्रोध, या घृणा होती हैं, तो ये शरीर में रोगों का कारण बन सकती हैं। इसलिए, सकारात्मक और प्रेमपूर्ण विचारों को अपनाने की सलाह दी गई है। लेखक ने यह भी बताया कि हमारे विचारों का हमारे चेहरे और आंखों पर स्पष्ट प्रभाव पड़ता है। मन और शरीर के बीच एक गहरा संबंध है, और मन के स्वस्थ विचारों से शरीर में स्वास्थ्य और सौंदर्य बढ़ता है। यदि मन में सकारात्मकता हो, तो व्यक्ति का जीवन भी सकारात्मक रूप से बदलता है। पाठ में यह भी चर्चा की गई है कि मन के विचारों को छिपाना संभव नहीं है, क्योंकि वे एक तरह से हमारे चेहरे पर प्रकट होते हैं। लेखक ने यह भी संकेत किया है कि मन के विचारों को नियंत्रित करने और नकारात्मकता को छोड़ने से हम शांति और आनंद प्राप्त कर सकते हैं। आखिर में, यह बताया गया है कि मन के नियंत्रण से ही हम अपने जीवन में शांति और संतोष पा सकते हैं, और संकल्पों के त्याग से मोक्ष की ओर बढ़ सकते हैं। मन की चंचलता और वासना को नियंत्रित करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि हम अपने उच्चतम आत्मा की पहचान कर सकें और वास्तविक आनंद का अनुभव कर सकें।


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