चिकित्साचन्द्रोदय ( भाग १) | Chikitsa Chandrodya ( part 1)

By: बाबू हरिदास वैध - Babu Haridas Vaidhya
चिकित्साचन्द्रोदय  ( भाग १) |  Chikitsa Chandrodya ( part 1) by


दो शब्द :

इस पाठ में लेखक ने अपने पहले ग्रंथ "स्वास्थ्यरक्षा" की चर्चा की है, जिसे उन्होंने अपने अनुभव और अध्ययन के आधार पर लिखा था। उन्होंने बताया कि इस पुस्तक को प्रकाशित करने में उन्हें काफी डर और संकोच था, लेकिन जब इसे लोगों ने सराहा, तो उन्हें बड़ा उत्साह मिला। इस पुस्तक ने पाठकों में स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाई और कई लोगों ने इससे लाभ उठाया। लेखक ने यह भी उल्लेख किया है कि उन्होंने "चिकित्माचन्द्रीदय" नामक एक और ग्रंथ लिखने का विचार किया था, लेकिन समय और संसाधनों की कमी के कारण वह इसे नहीं लिख सके। फिर भी, पाठकों की मांग को देखते हुए उन्होंने इस विषय पर एक नया ग्रंथ तैयार करने का निर्णय लिया। इस ग्रंथ में लेखक ने चिकित्सा से संबंधित विभिन्न अनुभवों और कठिनाइयों का उल्लेख किया है, जिससे पाठक बिना किसी कठिनाई के स्वास्थ्य संबंधी ज्ञान प्राप्त कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि आयुर्वेद का अध्ययन सभी के लिए आवश्यक है और इसे पढ़ने से लोग अपनी और दूसरों की स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान कर सकेंगे। लेखक ने पाठकों से निवेदन किया है कि वे उनकी इस पुस्तक के प्रति सहानुभूति रखें और किसी भी त्रुटि की ओर ध्यान दें ताकि अगली संस्करण में सुधार किया जा सके। अंत में, उन्होंने आशा व्यक्त की कि वह जल्द ही इस ग्रंथ का दूसरा भाग प्रस्तुत कर सकेंगे, जिसमें विभिन्न रोगों के निदान और चिकित्सा का विवरण होगा। इस प्रकार, पाठ में लेखक की स्वास्थ्य और चिकित्सा के प्रति जागरूकता, अनुभव और पाठकों के प्रति उनकी जिम्मेदारी का परिचय मिलता है।


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