सौंदर्य शास्त्र | Saundarya Sastra

- श्रेणी: साहित्य / Literature
- लेखक: डॉ हरद्वारी लाल शर्मा - Dr. Hardwari Lal Sharma
- पृष्ठ : 246
- साइज: 35 MB
- वर्ष: 1985
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दो शब्द :
सौन्दर्य-शास्त्र पर आधारित इस पाठ में सौन्दर्य और कला के महत्व को विस्तार से समझाया गया है। लेखक डॉ. हरद्वारी लाल शर्मा ने सौन्दर्य की परिभाषा और इसके विभिन्न पहलुओं पर विचार किया है। वे यह मानते हैं कि सौन्दर्य केवल कलाकारों का विशेषाधिकार नहीं है, बल्कि यह सभी मनुष्यों के लिए सहज और सामान्य अनुभव है। सौन्दर्य का अनुभव हमारे जीवन में तृप्ति, स्फूर्ति और शांति लाता है, और यह दार्शनिक दृष्टि से जीवन का आधार है। लेखक ने यह भी उल्लेख किया है कि सौन्दर्य का अध्ययन और समझना आवश्यक है, क्योंकि यह मानव संस्कृति और संवेदनशीलता का हिस्सा है। वे इस बात पर बल देते हैं कि सौन्दर्य के अनुभव के लिए एक संवेदनशील हृदय और निपुण बुद्धि की आवश्यकता होती है। साथ ही, उन्होंने यह चिंता व्यक्त की है कि हिंदी में सौन्दर्य-शास्त्र पर पर्याप्त साहित्य नहीं है और हमें स्वतंत्र विचार करने की आवश्यकता है। पुस्तक के तीसरे संस्करण में लेखक ने एक नया अध्याय जोड़ा है, जिसमें कला और सौन्दर्य के नए संदर्भों पर चर्चा की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि सौन्दर्य केवल एक भौतिक अनुभव नहीं है, बल्कि यह मानवता की गहरी संवेदनाओं और मूल्यों से जुड़ा हुआ है। लेखक ने उदाहरण देकर यह भी दिखाया है कि कभी-कभी समाज की सतही इच्छाएं सौंदर्य की गहराई को दबा देती हैं। इसलिए, उन्होंने कला और सौन्दर्य के अनुभव को जीवन की पूर्णता के लिए अनिवार्य बताया है। अंत में, लेखक ने अपने प्रयासों के लिए प्रोत्साहन देने वाले लोगों का आभार व्यक्त किया है और प्रकाशन के माध्यम से सौन्दर्य-शास्त्र के प्रति समाज में जागरूकता फैलाने की इच्छा व्यक्त की है।
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