शिक्षांक | Shikshank

- श्रेणी: इतिहास / History
- लेखक: राधेश्याम खेमका - Radheshyam Khemka
- पृष्ठ : 327
- साइज: 33 MB
- वर्ष: 1935
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दो शब्द :
यह पाठ विभिन्न देवी-देवताओं की स्तुति और प्रार्थनाओं से भरा हुआ है, जिसमें विशेष रूप से देवी सरस्वती की वंदना की गई है। इसमें देवी की विशेषताओं का वर्णन है, जैसे कि उनका दिव्य रूप, उनके हाथों में विद्या और ज्ञान का प्रतीक माने जाने वाले वस्त्र, और उनकी सुंदरता का वर्णन। पाठ में कई स्तोत्रों और मंत्रों का समावेश है, जो कि उच्च आत्मा और ज्ञान की प्राप्ति के लिए समर्पित हैं। इसमें संतों और ऋषियों के द्वारा दी गई शिक्षाओं का उल्लेख भी है, जिसमें शिक्षा के माध्यम से मानवता के विकास, नैतिकता, और आध्यात्मिकता पर जोर दिया गया है। शिक्षाओं को विभिन्न प्रमुख व्यक्तियों द्वारा प्रस्तुत किया गया है, जो भारतीय संस्कृति और ज्ञान के संरक्षण के प्रति समर्पित हैं। पाठ में शिक्षा की महत्ता, माता-पिता और शिक्षकों की भूमिका, और बच्चों के जीवन निर्माण में उनके योगदान पर भी प्रकाश डाला गया है। समग्र रूप से, यह पाठ आध्यात्मिकता, शिक्षा, और देवी सरस्वती की महिमा को दर्शाता है, और पाठकों को ज्ञान की ओर प्रेरित करता है।
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