विवेकानंद | Vivekananda

- श्रेणी: Speech and Updesh | भाषण और उपदेश Vedanta and Spirituality | वेदांत और आध्यात्मिकता ज्ञान विधा / gyan vidhya
- लेखक: रोमां रोला - Roma Rola
- पृष्ठ : 144
- साइज: 4 MB
- वर्ष: 1968
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दो शब्द :
इस पाठ में रामकृष्ण परमहंस और विवेकानन्द के जीवन और विचारों का परिचय दिया गया है। लेखक ने अपने अनुभवों और विचारों के माध्यम से बताया है कि कैसे रामकृष्ण का जीवन देवी की भक्ति में बीता और उन्होंने आध्यात्मिकता को अपने जीवन का केंद्र बनाया। रामकृष्ण का मानना था कि विभिन्नताओं में भी एक ही दिव्य शक्ति का दर्शन किया जा सकता है। उनकी साधना और अनुभवों ने उन्हें इस सिद्धांत तक पहुँचाया कि सभी जीवों में ईश्वर का अंश है। विवेकानन्द, जो रामकृष्ण के सबसे प्रमुख शिष्य थे, ने अपने गुरु की शिक्षाओं को फैलाने का कार्य किया। उनका दृष्टिकोण और कार्यशैली रामकृष्ण से भिन्न थी, लेकिन वे भी उसी आध्यात्मिकता के प्रचारक थे। विवेकानन्द ने कर्म को सर्वोत्तम मानते हुए इसे जीवन का मूल मंत्र बताया, और उन्होंने विश्व के सामने भारत की आध्यात्मिकता को प्रस्तुत किया। लेखक ने यह भी बताया कि विवेकानन्द की प्रेरणा और विचारों ने उन्हें संघर्ष के लिए प्रेरित किया और उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय मानवता की सेवा में बिताया। विवेकानन्द के विचारों में शक्ति और आत्मविश्वास की झलक मिलती है, जिससे वे समाज में एक परिवर्तन लाने का प्रयास करते थे। इस पाठ में भारतीय आध्यात्मिकता की गहराई, रामकृष्ण और विवेकानन्द के योगदान, और उनके विचारों का महत्व स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है। लेखक ने यह स्वीकार किया है कि पश्चिमी दृष्टिकोण से भारतीय आध्यात्मिकता को समझना कठिन है, लेकिन उन्होंने अपनी समझ के अनुसार इसे प्रस्तुत किया है।
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