कठोपनिषद | Kathopnishad

By: शंकरभाष्य - Shankarbhashy
कठोपनिषद | Kathopnishad by


दो शब्द :

इस पाठ में कठोपनिषद का सार प्रस्तुत किया गया है, जिसमें नचिकेता और यमराज के बीच संवाद का वर्णन है। नचिकेता, जो एक युवा ब्रह्मचारी है, अपने पिता वाजश्रवस द्वारा दिए गए दान से असंतुष्ट होकर यमराज के पास जाता है। वह यमराज से तीन वर मांगता है। पहले वर में वह चाहता है कि उसके पिता उसके प्रति शांतिपूर्ण और प्रसन्न रहें। दूसरे वर में नचिकेता मृत्यु के बाद के जीवन के रहस्यों को जानना चाहता है। यमराज प्रारंभ में उसे भौतिक सुखों का प्रस्ताव देते हैं, लेकिन नचिकेता का ध्यान आत्मज्ञान और सत्य की खोज पर होता है। अंत में, यमराज नचिकेता की तप और सत्यनिष्ठा को देखकर उसे आत्मज्ञान का वरदान देते हैं, जिससे वह मोक्ष प्राप्त कर सके। यह संवाद नचिकेता की जिज्ञासा और सत्य की खोज की गहराई को उजागर करता है। यमराज की शिक्षाएं जीवन, मृत्यु और आत्मा के पारलौकिक ज्ञान के बारे में महत्वपूर्ण संदेश देती हैं। पाठ का उद्देश्य नचिकेता के चरित्र और उसकी आत्मिक यात्रा के माध्यम से जीवन के गहन रहस्यों को उजागर करना है।


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