भविष्य पुराण भाषा | Bhavishya Puran Bhasha

By: पं. दुर्गा प्रसाद चौरसिया - Pt. Durga Prasad Chaurasia


दो शब्द :

इस पाठ में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को चार प्रमुख तत्व माना गया है, जिनके लिए मनुष्य प्रयास करता है। इन चारों में धर्म का स्थान सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि धर्म के माध्यम से अन्य सभी तत्वों की प्राप्ति संभव है। पाठ में यह बताया गया है कि पहले के समय में लोग वेदों का अध्ययन गंभीरता से करते थे, लेकिन कलियुग में मनुष्य की आयु और बुद्धि में कमी आई है, जिससे वे वेदों का अध्ययन नहीं कर पा रहे हैं। इस समस्या का समाधान करने के लिए वेदव्यास ने वेदों को चार भागों में विभाजित किया और विभिन्न पुराणों की रचना की, ताकि लोग थोड़े प्रयास में भी धर्म का ज्ञान प्राप्त कर सकें। भविष्यपुराण के अनुवाद का उद्देश्य यह है कि आम लोग सरल भाषा में धर्म के सिद्धांत और आचार को समझ सकें। इसमें बताया गया है कि धर्म का ज्ञान न होने पर आचरण भी संभव नहीं है, जिससे व्यक्ति की सभी जीवन की उपलब्धियाँ प्रभावित होती हैं। इसीलिए, पाठ का मुख्य संदेश यह है कि धर्म का पालन करना और धर्म का ज्ञान प्राप्त करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि मनुष्य अपने जीवन में सुख, समृद्धि और शांति को प्राप्त कर सके। भविष्यपुराण में विभिन्न विषयों का समावेश किया गया है, जैसे यज्ञोपवीत, विवाह, धार्मिक आचार, संस्कार, और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का विवरण। अंत में लेखक ने पाठकों से निवेदन किया है कि वे अनुवाद में यदि कोई त्रुटि पाते हैं, तो उसे क्षमा करें और केवल गुणों को स्वीकार करें।


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