प्राचीन भारतीय संस्कृति, कला , राजनीती ,धर्म तथा दर्शन | Prachin Bhartiya Sanskriti, Kala, Rajniti, Dharm tatha Darshan

By: ईश्वरी प्रसाद - Ishwari Prasad शैलेन्द्र शर्मा - Shailendra Sharma


दो शब्द :

प्राचीन भारतीय संस्कृति के विकास और उसका निरंतरता बनाए रखने की विशेषताएँ इस पाठ का मुख्य विषय हैं। लेखक ने यह बताया है कि भारत और चीन ही ऐसी संस्कृतियाँ हैं जो विभिन्न आक्रमणों और संघर्षों के बावजूद अपनी परंपराओं को जीवित रख सकी हैं। भारत ने विदेशी आक्रमणों को आत्मसात करते हुए उन्हें अपनी आध्यात्मिक विचारधारा में समाहित किया, जिससे भारतीय समाज में एकता और विविधता का अद्भुत उदाहरण देखने को मिलता है। भारतीय संस्कृति की विशेषता इसकी विविधता और एकता है, जो विभिन्न क्षेत्रों जैसे कला, राजनीति, धर्म, और दर्शन में दृष्टिगोचर होती है। यह संस्कृति न केवल अपने भीतर विविधता को समेटे हुए है, बल्कि इसे निरंतर विकासशील भी रखा है। लेखक ने यह भी बताया कि इस ग्रंथ में भारतीय संस्कृति के मूल तत्व, सिन्धु सभ्यता, वेदिक संस्कृति, और अन्य महत्वपूर्ण कालों की संस्कृति का विश्लेषण किया गया है। पाठ में यह भी उल्लेख किया गया है कि अतीत की उपलब्धियों के प्रति अंधनिष्ठा से बचते हुए एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाया गया है। इसमें विभिन्न आधुनिक स्रोतों का भी उपयोग किया गया है ताकि पाठ को उपयोगी और सुगम बनाया जा सके। कुल मिलाकर, यह ग्रंथ प्राचीन भारतीय संस्कृति के सभी पहलुओं का समग्र विवरण प्रस्तुत करता है, जो अध्ययन और अनुसंधान के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ है।


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