गोरख दर्शन | Gorakh Darshan

- श्रेणी: दार्शनिक, तत्त्वज्ञान और नीति | Philosophy साधना /sadhana साहित्य / Literature
- लेखक: अक्षयकुमार वनर्जी - Akshay Kumar Banerjee
- पृष्ठ : 353
- साइज: 35 MB
- वर्ष: 1970
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दो शब्द :
गोरख दर्शन गोरखनाथ और उनके अनुयायियों के योग और दर्शन के महत्व को उजागर करता है। महंत दिग्विजयनाथ जी ने नाथपंथ के आचार और दर्शन के प्रचार में गहरी रुचि दिखाई। उनका मानना था कि गोरखपंथ का व्यापक प्रचार राष्ट्रीय जीवन के उत्थान और देश की अखंडता के लिए आवश्यक है। अक्षयकुमार बनर्जी, जो गोरखपंथ के एक प्रमुख साधक थे, ने गोरखनाथ की योग साधना और उनके सिद्धांतों को समझने के लिए महत्वपूर्ण साहित्य लिखा। गोरखनाथ का योग मार्ग नाथयोग कहलाता है, जिसे भगवान शिव से जोड़ा जाता है। गोरखनाथ ने योग-दर्शन की प्राचीन परंपराओं को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत किया और इसे जीवित परंपरा के रूप में स्थापित किया। गोरखपंथ से जुड़ी उपासना केंद्रों में अन्य देवताओं जैसे काली, गणेश, और हनुमान की भी पूजा की जाती है, जो शिव से जुड़े हैं। गोरखनाथ ने साधना, आचार और संगठन के स्तर पर विभिन्न धार्मिक और दार्शनिक विचारों को समाहित किया। उनका सिद्धांत 'समतत्व' पर आधारित है, जो जीवन के सभी पहलुओं में सामंजस्य की स्थापना करता है। गोरखनाथ द्वारा रचित कई ग्रंथ हैं, जो योग, सिद्धांत और साधना के विषयों पर प्रकाश डालते हैं। सिद्ध और नाथ साहित्य का अध्ययन पिछले कुछ समय से बढ़ रहा है, जिसमें विभिन्न विद्वानों ने नाथ सिद्धों की रचनाओं का संपादन और विवेचन किया है। यह साहित्य गोरखनाथ और उनके अनुयायियों की साधना और विचारधारा को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
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