अभ्युदय खंड १ | Abhyuday Part 1

By: नरेन्द्र कोहली - Narendra kohli
अभ्युदय  खंड १ | Abhyuday Part 1 by


दो शब्द :

यह पाठ "अभ्युदय" नामक उपन्यास का एक अंश है, जिसमें विश्वामित्र नामक एक गुरु की पीड़ा और उनके आश्रम में हो रहे संकट का वर्णन किया गया है। विश्वामित्र को अपने शिष्य पुनर्वसु से यह जानकर दुख होता है कि उनके आश्रम के एक शिष्य, नक्षत्र, की हत्या राक्षसों ने कर दी है। इस घटना से विश्वामित्र का मन उद्विग्न हो जाता है और वे आश्रमवासियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित महसूस करते हैं। जब वे नक्षत्र के शव के पास पहुंचते हैं, तो उनकी आंखों के सामने एक भयावह दृश्य होता है। नक्षत्र का शरीर पूरी तरह क्षत-विक्षत है, और इसका सामना करते हुए विश्वामित्र को अपने कर्तव्यों का एहसास होता है। वे सोचते हैं कि उनके आश्रम में राक्षसों की उपस्थिति और उनके द्वारा किए जा रहे अत्याचारों के प्रति उन्हें क्या कदम उठाने चाहिए। सुकंठ, जो नक्षत्र के साथ था, बताता है कि उन्होंने राक्षसों को मदिरा पीकर अशिष्ट व्यवहार करते देखा था और जब उन्होंने राक्षसों का विरोध किया, तब उन्हें नक्षत्र की हिंसक हत्या का सामना करना पड़ा। सुकंठ की यह कहानी सुनकर विश्वामित्र को अपने अंदर की कमजोरी और उद्यमहीनता का अहसास होता है। इस प्रकार, इस पाठ में विश्वामित्र के संघर्ष, उनके शिष्यों की सुरक्षा और राक्षसों के प्रति उनकी जिम्मेदारी का चित्रण किया गया है। यह पाठ न केवल एक कथा है, बल्कि यह गुरु-शिष्य संबंध और नैतिकता के प्रश्नों पर भी विचार करने का अवसर प्रदान करता है।


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