भारत के जनप्रिय सम्राट | Bharat ke Janpriy Samrat

By: फणीन्द्र नाथ चतुर्वेदी - Phaneendra nath Chaturvedi
भारत के जनप्रिय सम्राट | Bharat ke Janpriy Samrat by


दो शब्द :

यह पाठ भारत के इतिहास में जनप्रिय सम्राटों की चर्चा करता है, जो शासन की कला और अपने समय में लोगों के प्रति अपने कार्यों के कारण प्रसिद्ध हुए। लेखक फणीन्द्र नाथ चतुर्वेदी ने विभिन्न सम्राटों का समावेश किया है, जिनमें राजा पुरूरवा, राजा वृत्रासुर, राजा अम्बरीष, राजा ययाति, राजर्षि ऋषभदेव, मगधनरेश जरासन्ध, राजा परीक्षित, सम्राट बिम्बिसार, सम्राट अजातशत्रु, सिकन्दर महान, चन्द्रगुप्त मौर्य, सम्राट अशोक, सम्राट कनिष्क, समुद्रगुप्त, चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य, सम्राट स्कन्दगुप्त, सम्राट हर्षवर्धन, राजा भोज, शेरशाह सूरी, छत्रपति शिवाजी और छत्रसाल का उल्लेख है। प्रत्येक सम्राट के जीवन, उनके शासनकाल, उनके द्वारा किए गए कार्य, उनकी नीतियों और उनके संघर्षों का वर्णन किया गया है। यह पाठ बताता है कि कैसे ये सम्राट अपने समय में जनप्रिय बने, कैसे उन्होंने अपने राज्यों का विस्तार किया, अपने लोगों के कल्याण के लिए कार्य किए और अपने धर्म और संस्कृति की रक्षा की। लेखक का उद्देश्य यह बताना है कि जनप्रियता का आधार न केवल शक्ति और सामर्थ्य है, बल्कि यह उस सेवा, न्याय और धर्म के प्रति प्रतिबद्धता से भी जुड़ा है, जो एक सम्राट अपने प्रजा के प्रति निभाता है। पाठ अंत में ध्यान दिलाता है कि आज के लोकतंत्र में भी उन सम्राटों के गुणों को समझना और अपनाना आवश्यक है, ताकि हम जनप्रियता के रंगों से अपने जीवन को रंग सकें।


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