राजस्थानी सबद कोस (खंड ३) | Rajasthani sabad Kos ( part3)

By: रणवीर सिंह - Ranveer Singh
राजस्थानी सबद कोस  (खंड  ३)  |  Rajasthani sabad Kos ( part3) by


दो शब्द :

प्रकाशक चौपासनी शिक्षासमित्ति द्वारा गठित उपसमिति, राजस्थानी शब्दकोश का यह पाठ तृतीय खंड की तीसरी जिल्द की जानकारी देता है। यह कोश राजस्थान की स्थानीय भाषा राजस्थानी के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण प्रयास है, जो भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा समर्थित है। इस जिल्द में "म" अक्षर से संबंधित सभी शब्दों को शामिल किया गया है और इसका प्रकाशन एक साल पांच महीने के भीतर किया गया है। इस जिल्द में कुल 15,334 शब्द शामिल हैं, और शब्दों का अर्थ विस्तार से वर्णित किया गया है, जिससे पृष्ठ संख्या लगभग 700 हो गई है। पहले खंड की तुलना में यह संख्या अधिक है। अब तक, कोश की कुल पृष्ठ संख्या 3,950 और शब्द संख्या 102,428 तक पहुँच चुकी है। चतुर्थ खंड के लिए चार जिल्दें शेष हैं, जिनका प्रकाशन जल्द ही होने की संभावना है। कोश की लागत बढ़ने का कारण कागज की महंगाई और पृष्ठ संख्या में वृद्धि है। प्रकाशक ने सभी पाठकों, विद्वानों और साहित्य सेवियों को धन्यवाद दिया है, जिन्होंने इस कार्य में सहयोग किया है। उन्होंने यह भी आश्वस्त किया है कि कोश को शीघ्र पूर्ण किया जाएगा और इसके प्रकाशन में किसी प्रकार की रुकावट नहीं आएगी। इस प्रयास में सीतारामजी लालस का विशेष योगदान रहा है, जिन्होंने राजस्थानी कोश के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कोश के लिए वित्तीय सहायता विभिन्न स्रोतों से प्राप्त हुई है और इसे पूर्ण करने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं। यह कोश राजस्थानी भाषा और साहित्य के विकास में एक मील का पत्थर साबित होगा।


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