भारतीय दर्शनशास्त्र का इतिहास | Bhartiya Darshan Shastra ka Itihas

By: देवराज - Devraj महामहोपाध्याय श्री गोपीनाथ कविराज - Mahamahopadhyaya Shri Gopinath Kaviraj


दो शब्द :

इस पाठ में भारतीय दशनशाख का इतिहास प्रस्तुत किया गया है। लेखक ने भारतीय दर्शन के विभिन्न पहलुओं और उसकी शाखाओं का विस्तृत अध्ययन किया है। पुस्तक में दशनशास्त्र की आवश्यकता और उसकी परिभाषा पर प्रकाश डाला गया है, साथ ही यह भी बताया गया है कि दशनशास्त्र अन्य विज्ञानों से कैसे संबंध रखता है। भारतीय दशनशास्त्र की विशेषताओं, आशावाद और निराशावाद, ज्ञान की महिमा, साधना की एकता, और संगीत-मयता के विषय में भी चर्चा की गई है। लेखक ने यह स्वीकार किया है कि भारतीय मस्तिष्क की एक विशेषता उसकी आलस्य और धीमी गति है, जो आज के तेज़ गति के युग में उपयुक्त नहीं है। उन्होंने यह भी बताया है कि भारतीय साहित्य, विशेषकर दार्शनिक साहित्य, की स्थिति दयनीय है और हिन्दी में उच्च कोटि के कवियों और उपन्यासकारों का अभाव है। लेखक ने यह भी संकेत दिया है कि हमारे देश की भाषाओं में दर्शन, विज्ञान, राजनीति, और इतिहास जैसे विषयों पर समृद्ध साहित्य की कमी है। पुस्तक में दार्शनिक संप्रदायों का संक्षिप्त विवरण दिया गया है, जिनमें कुछ प्रमुख वैष्णव संप्रदायों का उल्लेख किया गया है। लेखक ने यह भी व्यक्त किया है कि उन्होंने जिन दार्शनिक विचारकों के विचारों का संकलन किया है, उनके प्रति आभार प्रकट किया है। पुस्तक के लिखने में उन्हें कई विद्वानों की सहायता प्राप्त हुई है। लेखक ने यह भी स्पष्ट किया है कि दर्शनशास्त्र का उद्देश्य जीवन की समस्याओं पर प्रकाश डालना है और यह केवल ज्ञान का संग्रह नहीं, बल्कि विचारशीलता का प्रतीक है। इस प्रकार, यह पुस्तक भारतीय दशनशाख के इतिहास का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जो पाठकों को भारतीय दर्शन के समृद्ध और विविधतापूर्ण विचारों से अवगत कराती है।


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