सर्प विष चिकित्सा | Sarp Vish Chikitsa

- श्रेणी: Aushadhi | औषधि Ayurveda | आयुर्वेद Health and Wellness | स्वास्थ्य
- लेखक: गिरिवरनारायण जी जैन - Girivrnarayan ji Jain
- पृष्ठ : 72
- साइज: 2 MB
- वर्ष: 1939
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दो शब्द :
इस पाठ में सर्पों के दंश और उनके उपचार पर चर्चा की गई है। सर्प मानव जाति का एक बड़ा दुश्मन है, और हर साल लाखों लोग सर्पदंश के कारण मरते हैं। लेखक ने इस विषय पर एक सरल और उपयोगी पुस्तक लिखी है, जिसमें सर्पों के विभिन्न प्रकार, उनके दंश के कारण और उनके उपचार के तरीके का वर्णन किया गया है। सर्पों के दंश से होने वाले घातक प्रभावों का उल्लेख करते हुए, लेखक ने बताया है कि सर्पदंश का इलाज तुरंत करना आवश्यक है। लेखक ने बताया है कि सर्पदंश के मामलों में उचित उपचार की कमी के कारण कई लोग मर जाते हैं। इस पुस्तक में सर्पों की विभिन्न जातियों और उनके दंश के लक्षणों के बारे में जानकारी दी गई है। लेखक ने सर्पों के व्यवहार के बारे में भी बताया है, जैसे कि वे क्यों काटते हैं और किस प्रकार के सर्प अधिक खतरनाक होते हैं। इसके साथ ही, दंश के बाद की चिकित्सा प्रक्रियाओं का भी विस्तार से वर्णन किया गया है, ताकि लोग सर्पदंश के मामलों में सही उपचार कर सकें। इस पुस्तक का उद्देश्य लोगों को सर्पों के प्रति जागरूक करना और उन्हें सही जानकारी प्रदान करना है, ताकि वे सर्पदंश के मामलों में सही निर्णय ले सकें और अपनी जान की रक्षा कर सकें। लेखक ने इस विषय पर सरल भाषा में लिखा है, जिससे पाठक आसानी से समझ सकें।
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