प्रतापी आल्हा और ऊदल | Pratapi Aalha Aur Udal

By: महर्षि वेद व्यास - Mahrshi Ved Vyas
प्रतापी आल्हा और ऊदल  | Pratapi Aalha Aur Udal by


दो शब्द :

यह पाठ चंद्रवंश की उत्पत्ति और इतिहास को विस्तार से वर्णित करता है। चंद्रमा के तेजस्वी स्वरूप से चंद्रवंश की सृष्टि होती है, जिसमें पुरुरवा नामक एक महान राजा का उल्लेख है। पुरुरवा ने अपनी राजधानी प्रतिप्लान नगरी स्थापित की, जो समस्त लोकों की संपत्ति में सर्वश्रेष्ठ थी। इसके बाद, पुरुरवा की पत्नी उर्वशी से पांच पुत्रों का जन्म होता है, जिनसे चंद्रवंश का विस्तार होता है। पाठ में चंद्रवंश के अन्य महान व्यक्तित्वों का भी उल्लेख किया गया है, जैसे नहुष, ययाति, और भरत, जिनका योगदान भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण रहा। पाठ में यह भी बताया गया है कि चंद्रवंश का विभाजन यदु, तु, भोज, अनुवंश, और पुरुवंश में हुआ। यदुवंश में भगवान श्री कृष्ण का जन्म होता है, जबकि पुरुवंश में कौरवों और पांडवों का उदय होता है। चंदेलों का उल्लेख करते हुए, पाठ बताता है कि चंदेलों ने बुंदेलखंड में अपनी शक्ति स्थापित की और महान राजा चंद्रवर्मा के नेतृत्व में राज्य का विस्तार किया। चंद्रवर्मा एक पराक्रमी योद्धा थे जिन्होंने अपने शासनकाल में कई यज्ञ और धार्मिक कार्य किए। चंदेलों का साम्राज्य कला, विद्या और संस्कृति के क्षेत्र में भी उन्नति करता है। इस प्रकार, पाठ चंद्रवंश और चंदेलों की वीरता, उनके राजनैतिक और सामाजिक योगदान को दर्शाते हुए एक विस्तृत ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत करता है।


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