कुमारसंभवम् | Kumarsambhavam

- श्रेणी: महकाव्य / mahakavya श्लोका / shlokas संस्कृत /sanskrit
- लेखक: कालिदास - Kalidas
- पृष्ठ : 350
- साइज: 33 MB
- वर्ष: 1886
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दो शब्द :
महाकवि कालिदास द्वारा रचित "कुमारसंभवम्" एक महत्वपूर्ण काव्य है जो भारतीय साहित्य में विशेष स्थान रखता है। इस काव्य का मुख्य विषय भगवान शिव और देवी पार्वती के प्रेम कथा के साथ-साथ उनके विवाह के संदर्भ में है। काव्य में हिमालय का वर्णन, प्राकृतिक सौंदर्य, और देवताओं का उल्लेख किया गया है। कविता की शुरुआत में हिमालय पर्वत का वर्णन है, जहाँ देवताओं का निवास होता है। इसके बाद, कालिदास ने काव्य में विभिन्न प्राकृतिक दृश्यों का चित्रण किया है, जैसे कि वहाँ की वनस्पति, जलवायु, और जीव-जंतु। हिमालय की भव्यता और उसकी दिव्यता का विस्तार से वर्णन किया गया है। काव्य में कवि ने शिव और पार्वती के प्रेम को विभिन्न रूपों में दर्शाया है। यह प्रेम केवल शारीरिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और भावनात्मक भी है। शिव की तपस्या और पार्वती की आराधना का वर्णन करते हुए, कवि ने यह दिखाने का प्रयास किया है कि प्रेम और भक्ति के माध्यम से ही मानव जीवन में सच्ची सुख और शांति प्राप्त की जा सकती है। संपूर्ण काव्य का उद्देश्य प्रेम, भक्ति, और निष्ठा का प्रसार करना है। यह न केवल एक प्रेम कथा है, बल्कि जीवन के गूढ़ सत्य और आध्यात्मिकता को भी उजागर करता है। कालिदास की विशेष रचनात्मकता और भाषा की सुंदरता इस काव्य को और भी आकर्षक बनाती है। कुल मिलाकर, "कुमारसंभवम्" एक महान काव्य है जो प्रेम, भक्ति और प्राकृतिक सौंदर्य के माध्यम से जीवन के गहरे अर्थों को प्रस्तुत करता है।
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