पुष्यमित्र | Pushyamitra

By: गुरुदत्त - Gurudutt
पुष्यमित्र | Pushyamitra by


दो शब्द :

इस पाठ में मानव-चरित्र और राजनीति के संबंध में विचार किए गए हैं। लेखक ने बताया है कि चरित्रहीनता राजनीति में अनेक समस्याओं का कारण बनती है और यह प्रक्रिया धीरे-धीरे होती है। उन्होंने बौद्ध पंचशील के सिद्धांत का उल्लेख किया है, जो शांति और सहिष्णुता का प्रतीक है, और यह बताया है कि जब इस सिद्धांत का पालन किया जाता है, तब साम्राज्य की स्थिरता बनी रहती है। लेखक ने सम्राट अशोक और उनके उत्तराधिकारियों के काल का उल्लेख किया, जहां अशोक की नीतियों का प्रभाव धीरे-धीरे कमजोर होता गया। इसके परिणामस्वरूप उनके साम्राज्य में विद्रोह और विदेशी आक्रमणों की स्थिति उत्पन्न हुई। पुष्यमित्र शुग का उल्लेख करते हुए बताया गया कि उनके काल में भारतीय राजनीति में बौद्ध प्रभाव कम होता गया और ब्राह्मणों का महत्व बढ़ा। महात्मा गांधी के अहिंसात्मक आंदोलन का उल्लेख करते हुए लेखक ने बताया कि यह आंदोलन स्वराज्य की प्राप्ति के लिए था, लेकिन इसके परिणामस्वरूप देश में विभाजन की मांग उठी। लेखक ने यह भी कहा कि गांधीजी की नीतियों में कुछ भ्रम था, जिससे मानव-चरित्र में गिरावट आई। अंत में, लेखक ने यह निष्कर्ष निकाला कि राजनीति में अहिंसा और पंचशील के सिद्धांत का पालन करना आवश्यक है, ताकि देश की एकता और शांति बनी रहे। इस पाठ में इतिहास और राजनीति के बीच संबंध को समझने का प्रयास किया गया है और यह बताया गया है कि कैसे विचारों और सिद्धांतों का पालन करने से राष्ट्र की दिशा निर्धारित होती है।


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