रस चिकित्सा | Ras Chikitsa

- श्रेणी: Aushadhi | औषधि Ayurveda | आयुर्वेद
- लेखक: अज्ञात - Unknown
- पृष्ठ : 446
- साइज: 24 MB
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दो शब्द :
इस पाठ में आयुर्वेद और विशेष रूप से रस-चिकित्सा का महत्व और इतिहास प्रस्तुत किया गया है। लेखक ने उन लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की है जो आयुर्वेद को पुनर्जीवित करने और उसे राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने में लगे हुए हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि आयुर्वेद की प्राचीनता और इसके सिद्धांतों को समझने के लिए अनेक ग्रंथों का अध्ययन आवश्यक है। पाठ में आयुर्वेद के चार वेदों, उपवेदों, वेदांगों और अन्य संबंधित ग्रंथों का उल्लेख किया गया है। विशेष रूप से, ब्रह्मा को आयुर्वेद का जनक माना गया है, और उनके द्वारा दिए गए ज्ञान का विस्तार विभिन्न ऋषियों द्वारा किया गया है। आयुर्वेद में चिकित्सा के आधार पर त्रिदोषों का अध्ययन और रोगों की पहचान के विभिन्न तरीकों का वर्णन किया गया है। लेखक ने यह भी बताया है कि विभिन्न देवताओं जैसे विष्णु और महेश्वर का आयुर्वेद में महत्वपूर्ण स्थान है, और उनके नाम से कई चिकित्सा पद्धतियाँ और औषधियाँ जुड़ी हुई हैं। इसके अलावा, सूर्य को भी आयुर्वेद में महत्वपूर्ण चिकित्सक माना गया है, जो विभिन्न रोगों के निदान और उपचार में सहायक होते हैं। पाठ का सारांश यह है कि आयुर्वेद एक प्राचीन और समृद्ध चिकित्सा प्रणाली है, जिसके विभिन्न पहलुओं का अध्ययन और अनुसंधान आवश्यक है ताकि इसके ज्ञान को पुनर्जीवित किया जा सके और इसे आधुनिक चिकित्सा के साथ समन्वित किया जा सके।
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