भद्रबाहु संहिता | Bhadrabahu Samhita

- श्रेणी: जैन धर्म/ Jainism धार्मिक / Religious
- लेखक: भद्रबाहु - Bhadrabahu
- पृष्ठ : 496
- साइज: 14 MB
- वर्ष: 1944
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दो शब्द :
इस पाठ में भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा स्थापित मूर्तिदेवी जेन-अन्धमाला के संदर्भ में विभिन्न विषयों की चर्चा की गई है। यह ग्रंथ प्राचीन संस्कृत साहित्य, ज्योतिष, गणित और फलित ज्योतिष के विभिन्न पहलुओं पर केंद्रित है। पाठ में उल्लेख किया गया है कि ज्योतिष का ज्ञान मानवता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है, जिसमें भविष्यवाणी और विभिन्न ग्रहों की स्थिति के आधार पर जीवन के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया गया है। ग्रंथ में ज्योतिष के प्रकारों का वर्णन किया गया है, जैसे गणितीय ज्योतिष और फलित ज्योतिष। गणितीय ज्योतिष में ग्रहों की गति और स्थितियों का अध्ययन किया जाता है, जबकि फलित ज्योतिष में ग्रहों की स्थितियों के आधार पर शुभ और अशुभ फल की भविष्यवाणी की जाती है। पाठ में यह भी बताया गया है कि ज्योतिष विज्ञान में प्राचीन ग्रंथों का योगदान महत्वपूर्ण है, और कई विद्वानों ने इस क्षेत्र में शोध किया है। इसके अलावा, पाठ में यह भी उल्लेख किया गया है कि भविष्यवाणियों की सटीकता पर संदेह किया जा सकता है, और कई बार ये भविष्यवाणियाँ सत्य नहीं निकलतीं। फिर भी, विभिन्न संस्कृतियों में ज्योतिष का महत्व बना रहा है और इसे विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संदर्भों में उपयोग किया जाता रहा है। अंत में, पाठ में ग्रंथ के संपादक का उल्लेख किया गया है, जिसने प्राचीन ग्रंथों का अध्ययन करके इस विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी प्रस्तुत की है। पाठ का समापन विद्वानों और प्रकाशकों के प्रति प्रशंसा के साथ किया गया है।
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