श्रंखला की कड़ियाँ | Shrankhala Ki Kadiyan

By: महादेवी वर्मा - Mahadevi Verma
श्रंखला की कड़ियाँ | Shrankhala Ki Kadiyan by


दो शब्द :

महादेवी वर्मा ने भारतीय नारी की समस्याओं का विवेचन करते हुए अपने लेखन में नारी की विषम परिस्थितियों और उनके अधिकारों पर प्रकाश डाला है। वे अपनी अनुभूतियों के माध्यम से समाज में नारी की स्थिति का विश्लेषण करती हैं। उन्होंने बताया है कि भारतीय नारी को समाज में दोहरी स्थिति का सामना करना पड़ता है, जहां वह एक ओर देवी के रूप में पूजनीय है और दूसरी ओर तिरस्कृत और दीन समझी जाती है। महादेवी का मानना है कि नारी की शक्ति और अधिकार समाज के सहयोग और विकास पर निर्भर करते हैं। वे बताती हैं कि नारी में अधिकारों की इच्छा के साथ-साथ उसे अपने अंदर की शक्तियों को भी जागरूक करना होगा। वे नारी की मानसिकता को पुरुषों से भिन्न मानती हैं और उसकी कोमलता, प्रेम और संवेदनशीलता को उसकी ताकत मानती हैं। महादेवी ने प्राचीन काल में नारी के सम्मान और उसकी स्वतंत्रता को रेखांकित किया है। उन्होंने उदाहरण दिए हैं जैसे सीता, जो अपने कर्तव्यों के प्रति सजग थीं और अपने पति के प्रति समर्पित थीं। नारी का व्यक्तित्व केवल पुरुष की छाया नहीं है, बल्कि वह अपने आप में एक स्वतंत्र अस्तित्व है। महादेवी यह भी बताती हैं कि नारी को अपने व्यक्तित्व को पहचानने और उसे विकसित करने की आवश्यकता है, ताकि वह समाज में अपनी भूमिका को समझ सके और अपने अधिकारों के लिए खड़ी हो सके। उनका यह लेखन नारी शिक्षा और जागरूकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे भारतीय नारी की समस्याओं का समाधान संभव हो सकेगा।


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