भारतीय संबिधान तथा नागरिक जीवन | Bhartiya Sambidhan Tatha Nagrik Jeevan

- श्रेणी: Crime,Law and Governance | अपराध ,कानून और शासन Freedom and Politics | आज़ादी और राजनीति भारत / India
- लेखक: राजनारायण गुप्त - Rajnarayan Gupta
- पृष्ठ : 477
- साइज: 31 MB
- वर्ष: 1950
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दो शब्द :
इस पाठ में भारतीय संविधान और नागरिक जीवन के विभिन्न पहलुओं का विवेचन किया गया है। लेखक राजनारायण गुप्त ने स्वतंत्र भारत के पहले संविधान के निर्माण की प्रक्रिया और इसके महत्व को समझाने का प्रयास किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया है कि यह संविधान स्वतंत्रता, समानता, भाईचारे और न्याय के सिद्धांतों पर आधारित है, जो विश्व में शांति और सत्य की स्थापना में सहायक हैं। लेखक ने संविधान में नागरिकों को दिए गए मूल अधिकारों, इसके अनूठे पहलुओं, और भारत की प्राचीन संस्कृति से प्रेरणा लेने की विशेषताओं का उल्लेख किया है। इसके अलावा, उन्होंने संविधान के खिलाफ उठाए गए आरोपों और जनता के कर्तव्यों पर भी चर्चा की है। पुस्तक की भाषा सरल रखी गई है ताकि हिंदी के सीमित ज्ञान वाले पाठक भी इसे समझ सकें। पुस्तक के दूसरे भाग में भारतीय नागरिक जीवन के आठ अध्याय शामिल हैं, जो सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक जीवन की विशेषताओं, शिक्षा की समस्याओं, धर्म के स्थान, और विशेष अधिकारों के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं। यह पुस्तक विशेषकर इंटरमीडिएट कक्षाओं के छात्रों के लिए उपयोगी है और इसमें नए पाठ्यक्रम के अनुसार सभी विषयों का विस्तृत विवेचन किया गया है। अंत में, लेखक ने पाठकों से सुझाव मांगते हुए पुस्तक के सुधार की संभावनाओं पर ध्यान दिया है, जिससे पाठक इस महत्वपूर्ण विषय के प्रति जागरूक हो सकें।
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