हरियाणा प्रदेश का लोकसाहित्य | Hariyana Pradesh Ka Lok Sahitya

- श्रेणी: Cultural Studies | सभ्यता और संस्कृति हिंदी / Hindi
- लेखक: डॉ. शंकर लाल यादव - Dr. Shankar Lal Yadav
- पृष्ठ : 498
- साइज: 39 MB
- वर्ष: 2000
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दो शब्द :
हरियाणा प्रदेश का लोकसाहित्य एक महत्वपूर्ण शोध प्रबंध है, जिसे डाक्टर शंकर लाल यादव ने लिखा है। यह पुस्तक हरियाणा के लोकगीत, लोककथा, लोकगाथा और अन्य प्रकीर्ण साहित्य का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करती है। लेखक ने अपने गहन शोध में सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहलुओं को भी शामिल किया है, जिससे हरियाणा की समृद्ध लोकसंस्कृति का पता चलता है। पुस्तक का प्रकाशन हिन्दुस्तानी एकेडेमी ने किया है, और यह लोकसाहित्य के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण योगदान है। लेखक ने बताया है कि लोकसाहित्य समाज का प्रतिनिधित्व करता है और यह जन-जीवन की वास्तविकताओं को बिना किसी सजावट के प्रकट करता है। इसे साहित्यिकता और कलात्मकता के स्तर पर नागर साहित्य से कमतर माना जा सकता है, लेकिन यह साहित्य, संगीत और कला का मूल प्रेरक है। लोकसाहित्य का अध्ययन पाश्चात्य देशों में 16वीं शताब्दी से शुरू हुआ था, और भारत में भी इसे गंभीरता से लिया जाने लगा। डाक्टर यादव ने हरियाना क्षेत्र के लोक साहित्य का अध्ययन करते समय विभिन्न बोलियों और गीतों को संग्रहित किया, जो उनके अनुभवों और यात्राओं पर आधारित हैं। उन्होंने यह कार्य बहुत मेहनत और लगन से किया, जिसमें उन्होंने ग्रामीण समुदाय के साथ संवाद स्थापित किया और उनके द्वारा प्रचलित गीतों और कहानियों को संकलित किया। इस शोध में एक बृहद शब्दसूची और तीन गीतों की स्वर लिपि भी शामिल की गई है, जो इस क्षेत्र की भाषाई समृद्धि को दर्शाती है। डाक्टर यादव की यह पुस्तक लोकसाहित्य के अध्येताओं के लिए उपयोगी साबित होगी और इसे विद्वत्समाज में सराहना मिलेगी। उनका यह प्रयास हरियाणा के लोकसाहित्य के महत्व को उजागर करता है और इसे व्यापक रूप से पहचान दिलाने में सहायक होगा।
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