मेवाड़ का इतिहास | Mewar Ka Itihas

By: श्यामलदास - Shyamaldas
मेवाड़ का इतिहास | Mewar Ka Itihas by


दो शब्द :

"वीरजिनोद" एक ऐतिहासिक ग्रंथ है जो महाराणा सज्जनसिंह के समय की घटनाओं का वर्णन करता है। इसमें महाराणा जयसिंह और उनके दरबार के सदस्यों के बीच संवाद और घटनाओं का विस्तृत विवरण दिया गया है। ग्रंथ में यह बताया गया है कि किस प्रकार महाराणा जयसिंह ने अपने दरबार में बैठे लोगों को संबोधित किया और उनके बीच की रस्मों-रिवाजों का पालन किया गया। इस पाठ में खासतौर पर यह देखा गया है कि जब महाराणा उदयपुर की ओर रवाना हुए, तो उनके साथ राजकीय कार्य और सैन्य तैयारियों का भी उल्लेख किया गया है। पाठ में वर्णित घटनाओं में सर्दारों और दरबारी लोगों की गतिविधियों, उनके बैठकों और संवादों का उल्लेख है, जो उस समय की राजनीतिक और सामाजिक स्थितियों को उजागर करता है। ग्रंथ में यह भी उल्लेख है कि कैसे विभिन्न पर्गनों और क्षेत्रों के बारे में जानकारी इकट्ठा की गई और किस प्रकार से साम्राज्य की व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पहल की गई। इसके अलावा, पाठ में साम्राज्य के वित्तीय मामलों, कर संग्रहण और ठेकों के बारे में भी चर्चा की गई है। कुल मिलाकर, "वीरजिनोद" एक ऐतिहासिक दस्तावेज है जो उस समय की राजनीति, प्रशासनिक व्यवस्था और सामाजिक संरचना का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।


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