नीलमदेश की राजकन्या और अन्य कहानियाँ | Nilam Desh Ki Rajkanya Aur Anya Kahaniyan

- श्रेणी: बाल पुस्तकें / Children साहित्य / Literature
- लेखक: जैनेन्द्र कुमार - Jainendra Kumar
- पृष्ठ : 237
- साइज: 14 MB
- वर्ष: 1938
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दो शब्द :
यह पाठ एक व्यक्ति के जीवन की कहानी है, जिसमें वह अपनी किशोरावस्था और युवा अवस्था के अनुभवों को साझा करता है। कहानी का नायक, जो पेशे से डॉक्टर है, अपने बचपन के दिनों को याद करता है, जब वह ग्वालियर में रहता था और कानपुर में पढ़ाई कर रहा था। उसकी ज़िंदगी में एक लड़की, सुभद्रा, आती है, जिससे वह भावनात्मक रूप से जुड़ने की कोशिश करता है। लेकिन सुभद्रा की सगाई कहीं और हो रही है, जिससे नायक को गहरा आघात लगता है। वह सुभद्रा से पत्र के माध्यम से अपनी भावनाएँ व्यक्त करने की कोशिश करता है, लेकिन उसे कोई उत्तर नहीं मिलता। इसके बाद, वह अपने जीवन को आगे बढ़ाने का निर्णय लेता है, कानपुर छोड़कर लखनऊ चला जाता है और अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करता है। वह सफल हो जाता है और एक प्रतिष्ठित डॉक्टर बन जाता है, लेकिन उसके माता-पिता उसकी शादी के लिए दबाव डालते हैं। वक्त बीतता है और नायक अपनी डाक्टरी में व्यस्त रहता है। उसके माता-पिता की मृत्यु के बाद, वह अपनी कामयाबी में और अधिक लिप्त हो जाता है। अंततः, वह पैंतालीस वर्ष की उम्र में शादी करने का निर्णय लेता है, लेकिन उसकी शादी एक साधारण आवश्यकता के रूप में होती है, न कि प्रेम के आधार पर। एक दिन, जब वह मरीजों की कमी के कारण बोरियत महसूस कर रहा होता है, एक महिला, जो एक भद्र महिला है, उसके पास आती है। वह अपने मृत बच्चे की यादों के साथ आती है और उसकी ज़िंदगी की कठिनाइयों को साझा करती है। यह नायक को भावनात्मक रूप से प्रभावित करता है और वह सुभद्रा की यादों में खो जाता है। इस पाठ में प्रेम, असफलता, और ज़िंदगी के अनुभवों का गहरा चित्रण है, जिसमें नायक की भावनाएं और संघर्ष स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। उसकी ज़िंदगी के निर्णय और उनके परिणाम उसे एक ऐसे मोड़ पर लाते हैं, जहाँ वह फिर से अपनी खोई हुई भावनाओं का सामना करता है।
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