वन्द्या कल्पद्रुम | Vandhya Kalpadrum

By: रामेश्वरानन्द जीवानन्द शर्मा - Rameshwaranand Jeevanand Sharma
वन्द्या कल्पद्रुम | Vandhya Kalpadrum by


दो शब्द :

यह ग्रंथ विशेष रूप से स्त्री जाति के स्वास्थ्य और रोगों की चिकित्सा पर केंद्रित है। इसमें लेखक ने अपनी ओर से कोई व्यक्तिगत विचार नहीं रखा है, बल्कि यह ग्रंथ उन रोगों और चिकित्सा विधियों का विवरण प्रदान करता है जो स्त्री जाति के गुह्यांगों में उत्पन्न होते हैं। लेखक ने इस ग्रंथ को लिखने में 14 घंटे का समय बिताया है, ताकि स्त्री जाति को उनके रोगों का समुचित निदान और उपचार मिल सके। लेखक ने बताया है कि पहले प्रकाशित ग्रंथों में स्त्री जाति के गुह्यांगों से संबंधित रोगों का उचित समाधान नहीं दिया गया था। इसलिए उन्होंने इस ग्रंथ में उन सभी रोगों का विस्तार से वर्णन किया है, जिनसे स्त्रियाँ प्रभावित होती हैं। उन्होंने विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों जैसे आयुर्वेद, यूनानी और आधुनिक चिकित्सा का उपयोग करते हुए अपने अनुभव साझा किए हैं। इस ग्रंथ में 16 अध्याय हैं, जिनमें से 14 अध्याय स्त्री जाति के रोगों की चिकित्सा पर केंद्रित हैं, जबकि एक अध्याय पुरुषों की चिकित्सा और एक अध्याय बच्चों के रोगों के लिए है। प्रत्येक अध्याय में विभिन्न रोगों के लक्षण, निदान और उपचार की विधियाँ विस्तार से दी गई हैं। लेखक ने यह भी उल्लेख किया है कि संतान उत्पत्ति में बाधा उत्पन्न करने वाले दोषों का समावेश किया गया है, और यह ग्रंथ उन स्त्रियों के लिए एक संदर्भ ग्रंथ के रूप में कार्य करेगा, जो संतान उत्पत्ति में कठिनाई का सामना कर रही हैं। अंत में, लेखक ने पाठकों से अपील की है कि वे इस ग्रंथ को कन्या पाठशालाओं में पढ़ने के लिए शामिल करें और इसकी जानकारी अधिक से अधिक स्त्रियों और पुरुषों तक पहुँचाएँ, ताकि वे अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो सकें।


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