आधुनिक हिंदी साहित्य का विकास | Aadhunik Hindi Sahitya Ka Vikas

- श्रेणी: शिक्षा / Education साहित्य / Literature हिंदी / Hindi
- लेखक: डॉ बच्चन सिंह - Dr. Bachchan Singh
- पृष्ठ : 486
- साइज: 16 MB
- वर्ष: 1925
-
-
Share Now:
दो शब्द :
इस पाठ का सारांश इस प्रकार है: यह पाठ डॉ. श्रीकृष्ण लाल की मूल अंग्रेजी थीसिस का हिंदी अनुवाद है, जिसे प्रयाग विश्वविद्यालय द्वारा स्वीकृति मिली है। अनुवाद के दौरान लेखक को कुछ पारिभाषिक शब्दों के निर्माण में कठिनाई का सामना करना पड़ा, जिसके लिए उन्होंने पाठकों से क्षमा मांगी है। उन्होंने अपने मित्र पंडित रामानंद तिवारी का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने अनुवाद में सहायता की। इसके अलावा, अन्य सहयोगियों का भी उन्होंने उल्लेख किया है, जिन्होंने इस कार्य में उनका समर्थन किया। पाठ में आधुनिक हिंदी साहित्य के विकास की चर्चा की गई है। इसे विभिन्न विशेषताओं और परिवर्तन के कारणों के साथ प्रस्तुत किया गया है। लेखक ने बताया है कि इस युग में साहित्यिक रूपों में विविधता आई है और यह साहित्यिक क्रांति का समय है। उन्नीसवीं शताब्दी में काव्य, गद्य, नाटक और उपन्यास के क्षेत्र में उल्लेखनीय विकास हुआ। आधुनिक हिंदी साहित्य का यह युग वीरता, भक्ति और शृंगार के रस का समावेश करता है, जिसमें वीर रस की उत्कृष्टता, भक्ति का महत्व और शृंगार का अद्भुत प्रदर्शन देखने को मिलता है। लेखक ने विभिन्न कवियों की रचनाओं के उदाहरण देकर इस विकास को स्पष्ट किया है। इस प्रकार, पाठ हिंदी साहित्य के आधुनिक काल के विशेषताओं और विकास की एक समग्र दृष्टि प्रस्तुत करता है।
Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.